न्यूज़ देवघर 08/03/2026
दीक्षा का अर्थ होता है लंच और मंच का बदल जाना
मुनि दीक्षा स्मृति महोत्सव पूरे विश्व सहित देवघर में मनाया गया
पाटनी परिवार आर. के. मार्बल,बंडर सीमेंट राजस्थान की श्रीमति शांता पाटनी ने मुनि संघ आर्यिका संघ को आहारचर्या कराने का सौभाग्य प्राप्त किया
चरण चिह्न एवं विश्व की अनोखी प्रथम वेदी एंव रजत पत्र, ताम्रपत्र, पीतल पत्र,ताड़पत्र, 2000 वर्ष तक रहने वाले ग्रंथ उत्कीर्ण किए जाएंगे
ऐसे कई शिष्य है जिन्होंने एमएससी, एमटेक, डॉ.की डिग्री ,विदेश की सर्विस छोड़कर दीक्षा ली है
समाधिस्थ परम पूज्य
आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज से दीक्षित एवं परम पूज्य आचार्य श्री समय सागर जी महाराज के आज्ञानुवर्ती शिष्य मुनि श्री धर्म सागर जी महाराज,
मुनि श्री भाव सागर जी महाराज , आर्यिका श्री अनंत मति माताजी आर्यिका श्रीसूत्र मति माताजी सहित 13आर्यिका माताजी के सानिध्य में 8मार्च2026 को प्रातः काल की बेला में परम पूज्य आचार्य श्री समय सागर जी महाराज का मुनि दीक्षा स्मृति महोत्सव पूरे विश्व सहित देवघर में मनाया गया ,आचार्य श्री
की पूजन ,चित्र अनावरण,
दीप प्रज्वलन , पाद प्रक्षालन किया गया, आरती की गई,
सांस्कृतिक आयोजन संपन्न हुए ,जरूरतमंदों को आवश्यक सामग्री ,फल ,औषधि वितरित, किए गये,
, विशेष मांगलिक क्रियाएं संपन्न हुई, भारत के कई नगरों के लोग शामिल हुए, गुरु मंदिर में परम पूज्य आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के चरण चिह्न एवं विश्व की अनोखी प्रथम वेदी एंव रजत पत्र, ताम्रपत्र, पीतल पत्र,ताड़पत्र, 2000 वर्ष तक रहने वाले ग्रंथ उत्कीर्ण किए जाएंगे और विराजमान किये जाएंगे, एवं मुनि श्री धर्म सागर जी महाराज,
मुनि श्री भाव सागर जी महाराज , आर्यिका श्री संवेग मति माताजी, आर्यिका श्री शोधमति माताजी,आर्यिका श्री श्रुतमति माताजी, की आहारचर्या का सौभाग्य एवं शास्त्रदान का सौभाग्य देशके प्रसिद्ध उद्योगपति पाटनी परिवार आर. के. मार्बल,बंडर सीमेंट राजस्थान की श्रीमति शांता पाटनी को प्राप्त हुआ,ज्ञात होकि मुनि संघ एवं आर्यिका संघ की, तीर्थयात्रा चल रही है, मंदारगिरी , चंपापुर, पावापुर होते हुए गया पहुंचेंगे
इस अवसर पर धर्म सभा को संबोधित करते हुए आर्यिका श्रीसूत्र मति माताजी ने कहाकि पूरा विश्व ही सौभाग्यशाली है जो हमें ऐसे अवसर प्राप्त हो रहे हैं, गुरुदेव ने जीवंत समयसार की रचना की है, आचार्य भगवंत का बहुत बड़ा उपकार है, इतिहास की सबसे बड़ी घटना है कि एक मां से जन्मे दो आचार्य बने ऐसा इतिहास में कहीं नहीं मिलता है, आर्यिका श्री अनंत मति माताजी ने कहाकि गुरुदेव ने ऐसा बेजोड़ हीरा दिया है कि देश-विदेश के लोग लाभान्वित हो रहे हैं, गुरुदेव ने भारत को भारत ही बोला जाए इंडिया नहीं ऐसा कहा था, आस्था की डोर मजबूत हो तो आराध्य दूर भी हो तो निकट रहते हैं, गुरु और शिष्य एक दूसरे को पाकर धन्य हो गए,
मुनि श्री भावसागर जी महाराज ने कहा कि , आचार्य श्री विद्यासागर जी ने प्रथम मुनि दीक्षा समय सागर जी महाराज को दी थी,दीक्षा का अर्थ होता है लंच और मंच का बदल जाना,गुरु की महिमा को शब्दों की सीमा में नहीं बांधा जा सकता,गुरु सीमातीत है, गुणों के भंडार है, गुरु ही शिष्य के बुझे हुए दीप को प्रज्वलित कर सकते हैं,वह अंदर परमात्मा बनने की प्यास जगाते हैं, वह मोक्ष का ताला खोलना सिखाते हैं,गुरु कृपा से अनेक प्रकार के विद्या मंत्र सिद्ध हो जाते हैं ,वह आदर्श के देवता है,
गुरु निर्देशक जैसे होते हैं आचार्य श्री ने कई वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाए थे,गुरुदेव ने बड़े-बड़े महान कार्य किए हैं, वह कठिन ग्रंथ पढ़ते थे,वह बड़े-बड़े कवियों की टक्कर लेने वाले थे
गुरु जो कह रहे है स्वीकार कर लेना गुरु दक्षिणा है,आचार्य श्री विद्यासागर जी के ऐसे कई शिष्य है जिन्होंने एमएससी, एमटेक, डॉ.की डिग्री ,विदेश की सर्विस छोड़कर दीक्षा ली है,
विदेशी लोग ने आचार्य श्री की मूकमाटी पढ़ने के बाद मांसाहार,शराब का त्याग किया, था ,आचार्य श्री शब्दों के जादूगर थे, अनुशासन की जीवन्त मूर्ति थे,आचार्य श्री के पास नैनागिर मैं प्रवचन सुनने नाग नागिन आते थे, उनके दर्शन करके देश के राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, राज्यपाल ,मुख्यमंत्री ,सुप्रीम कोर्ट के जज, हाईकोर्ट के जज ,विचारक, साहित्यकार, शिक्षाविद, कानूनविद ,उद्योगपति ,प्रमुख संत ,विश्वविद्यालय कुलपति आए,
