इस समय किया पढा गया लॉन्ग टर्म मेमोरी में जाता है

हजारीबाग न्यूज़ 18/06/2026

इस समय किया पढा गया लॉन्ग टर्म मेमोरी में जाता है
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,*पढ़ाई के प्रति *पॉजिटिव कंडीशनिंग* होती है
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  • श्री धर्मनाथ भगवान का मोक्ष कल्याणक महोत्सव धूमधाम से मनाया गया
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    2000 वर्ष प्राचीन षट्खंडागम ग्रथोंकी पूजन की गई
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    मुनि श्रीप्रमाण सागर जी महाराज के गृहस्थ जीवन के परिवार जन को आहारदान का सौभाग्य
    प्राप्त हुआ
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    समाधिस्थ परम पूज्य
    आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज से दीक्षित एवं परम पूज्य आचार्य श्री समय सागर जी महाराज के आज्ञानुवर्ती शिष्य मुनि श्री धर्म सागर जी महाराज,मुनि श्री भाव सागर जी महाराज के सान्निध्य में 18जून2026 को प्रातः काल की बेला में श्री दिगंबर जैन बड़ा बाजार मंदिर
    हजारीबाग झारखंड से शोभा यात्रा निकाली गई जो विभिन्न मार्गो से होती हुई श्री दिगंबर जैन मंदिर बढम बाजार पहुंची जहां पर श्री धर्मनाथ भगवान के मोक्ष कल्याणक महोत्सव पर विशेष मांगलिक क्रियाएं संपन्न हुई, महामस्तकाभिषेक संपन्न हुआ, विशिष्ट मंत्र से शांति धारा की गई, निर्वाण लाडू अर्पण किया गया, 2000 वर्ष प्राचीन षट्खंडागम ग्रथोंकी पूजन की गई, श्रुत पंचमी महोत्सव का प्रथम चरण संपन्न हुआ,
    महिला वर्ग ने शास्त्र अर्पण का सौभाग्य प्राप्त किया, सभी को परम पूज्य आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के चरण चिह्न का स्मृति चिह्न प्रदान किया गया,
    इस अवसर पर धर्म सभा को संबोधित करते हुए
    मुनि श्री भाव सागर जी महाराज ने कहा कि जैन धर्म के सबसे बड़े ग्रंथ षट्खंडागम की हम पूजन कर रहे हैं, यह 2000 वर्ष प्राचीन ग्रंथ है, इनकी पूजन दर्शन करना सौभाग्य की बात होती है,
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    श्रुत पंचमी ज्ञान की ज्योति का पर्व है, ज्येष्ठ शुक्ल पंचमी श्रुत पंचमी कहलाती है। दिगंबर जैन परंपरा में यह पर्व ज्ञान पंचमी या “जैन आगम प्रकट दिवस के रूप में मनाया जाता है।
    जिस दिन भगवान महावीर की वाणी लिपिबद्ध होकर श्रुत के रूप में प्रकट हुई, वह दिन श्रुत पंचमी है।यह पर्व ग्रंथों का जन्मदिन है। जिस तरह हम महापुरुषों का जन्मदिन मनाते हैं, वैसे ही जैन समाज शास्त्रों का जन्मदिन मनाता है।
    श्रुत पंचमी मोक्षमार्ग का उत्सव है।
    इस दिन जिनवाणी की विशेष पूजा, स्वाध्याय, शास्त्र अपण का विधान है।
    प्रथमानुयोग, करणानुयोग, चरणानुयोग, द्रव्यानुयोग चारों अनुयोग की इस दिन पूजा होती हैं।
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    मान्यता है कि इस दिन मंत्र का जाप करने से स्मरण शक्ति बढ़ती है।
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    दिगंबर परंपरा में श्रुत पंचमी को “आचार्य परंपरा दिवस” भी कहते हैं। क्योंकि आगम की रक्षा आचार्यों ने ही की है।
    ज्येष्ठ शुक्ल पंचमी* को “षट्खंडागम” की रचना पूर्ण कर ताड़पत्र पर लिखा।गया था,यह दिन था श्रुत पंचमी। पहली बार महावीर की वाणी लिपिबद्ध हुई। इसलिए इसे “श्रुत अवतार दिवस” कहते है,श्रीवीरसेन आचार्य धवला-जयधवला टीका ज्येष्ठ शुक्ल पंचमी को ही पूर्ण की थी,श्रुत पंचमी आगम लेखन की अखंड परंपरा का प्रतीक है। ज्येष्ठ मास में सूर्य की पराबैंगनी किरणें तेज होती हैं। आयुर्वेद अनुसार इस समय पित्त बढ़ता है और मस्तिष्क सक्रिय रहता है। पंचमी तिथि को चंद्रमा 72-90 डिग्री पर होता है, जिससे सेरोटोनिन बढ़ता है। इस समय किया पढा गया लॉन्ग टर्म मेमोरी में जाता है। इसलिए प्राचीन गुरुकुलों में ज्येष्ठ में नया पाठ शुरू होता था।
    शास्त्र पूजन, ग्रंथों पर कवर चढ़ाना, यह सब “एसोसिएटिव लर्निंग” है। मस्तिष्क ज्ञान को सम्मान से जोड़ता है। इससे पढ़ाई के प्रति पॉजिटिव कंडीशनिंग होती है। आज के बच्चे भी अगर किताबों का पूजन करें तो पढ़ाई में रुचि बढ़ेगी। प्राचीन काल में ताड़पत्र-भोजपत्र पर ग्रंथ लिखे जाते थे। ज्येष्ठ शुक्ल पंचमी तक ग्रीष्म समाप्त, आर्द्रा नक्षत्र से वर्षा प्रारंभ। वर्षा से पहले ग्रंथों पर नीम-हल्दी का लेप, धूप दिखाना, वेष्टन बदलना होताहै। यही श्रुत पंचमी शास्त्र संरक्षण की वैज्ञानिक परंपरा बनी। कीट-दीमक से बचाव होता था।ज्ञान को उत्सव से जोड़ना “नॉलेज शेयरिंग कल्चर” बनाता है। शास्त्र दान की परंपरा से जैन शास्त्र भंडार इसी दिन की देन हैं।
    ग्रंथ नहीं, परमात्मा की वाणी है,
    टीवी-मोबाइल छोड़कर 1 घंटा मौन स्वाध्याय करे,
    बच्चों से पूछें बेटा, ये क्या है जब वो कहे भगवान तो समझाएं नहीं बेटा, ये भगवान की वाणी है। इससे भगवान बनते हैं।
    जिस घर में शास्त्र का सिंहासन नहीं, उस घर में संस्कार का सिंहासन नहीं श्रुत पंचमी ग्रंथों का जन्मदिन, ज्ञान का उत्सव है,
    ज्येष्ठ शुक्ल पंचमी श्रुत पंचमी के रूप में मनाता है। आज से लगभग 2000 वर्ष पूर्व इसी तिथि मे आचार्य भूतबलि,पुष्पदंत ने भगवान महावीर की वाणी को पहली बार षट्खंडागम ग्रंथ में लिपिबद्ध किया था।
    मान्यता है कि ज्ञान बिना मोक्ष संभव नहीं। इसलिए इस दिन जैन मंदिरों में शास्त्र भंडारों की विशेष पूजा, स्वाध्याय, एवं ज्ञानदान एवं ग्रंथों का वाचन हो,
    ज्येष्ठ माह में मस्तिष्क की सक्रियता अधिक होती है। इस समय किया गया स्वाध्याय दीर्घकाल तक याद रहता है। प्राचीन काल में वर्षा से पूर्व ग्रंथों के संरक्षण का भी कार्य होता था, यह युवा पीढ़ी मोबाइल छोड़कर 1 घंटा शास्त्र पढे। यही सच्ची श्रुत पंचमी होगी।
    श्रुत पंचमी केवल रस्म नहीं, ज्ञान क्रांति है। ,इस श्रुत पंचमी पर संकल्प लें प्रतिदिन10 मिनट शास्त्र को जरूर पढ़ेंसमाधिस्थ परम पूज्य आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के चरण चिह्न का मोमेंटो घर में रखने से गुरु की कृपा बनी रहती है, शुभ मुहूर्त में कार्य करने से कई गुना सफलता मिलती है, आप अपना जन्मदिन एवं मैरिज एनिवर्सरी तो मनाते हैं, लेकिन वह पुण्यशाली भाग्यशाली महासौभाग्यशाली होते हैं जो जिनवाणी का बर्थडे मनाते हैं,
    जिन महिलाओं ने जिनवाणी को अपने मस्तक पर रखा है वह बड़ी सौभाग्यशाली हैं,
    मुनि श्री धर्मसागर जी महाराज ने कहा कि जो वस्तु अच्छी भी लगती है तो उसको सीमित मात्रा में ग्रहण करना चाहिए, भगवान का मोक्ष कल्याणक महोत्सव देवताओं ने भी मनाया था, आप लोगों ने भी बड़े उत्साह के साथ मनाया है, विजय लुहाडिया ने जानकारी दी कि
    परम पूज्य मुनि श्री धर्मसागर जी महाराज
    एवं परम पूज्य मुनि श्री भावसागर जी महाराज
    *को आहार दान का सौभाग्य
    श्री अरविंद कुमार सेठी प.पू. मुनि श्रीप्रमाण सागर जी महाराज के गृहस्थ जीवन के परिवार जन को
    प्राप्त हुआ

कार्यक्रम का प्रसारण जैन धर्म वाणी यूट्यूब चैनल जैन वर्ल्ड विद्यापर
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जैनधर्म वाणी, Jain world vidh ya
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आयोजक
सकल दिगंबर जैन समाज पंचायत कमेटी हजारीबाग (झारखंड)
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संपूर्ण जानकारी हेतु संपर्क सूत्र
संभव जैन भोपाल
62 60 1513 50

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