अष्टानि्हका महापर्व के प्रथम दिन संपन्न हुई क्रियाएं

न्यूज़ वाराणसी 21/07/2026
🌹🍀🏵️🌱🍁🍀🥀

अष्टानि्हका महापर्व के प्रथम दिन संपन्न हुई क्रियाएं
🌹🍀🏵️🌱🍁🍀🥀
श्री सिद्ध चक्र महामंडल की मांगलिक क्रियाएं की गई
🌹🍀🏵️🌱🍁🍀🥀
मंदिर का प्राण होती है ध्वजा
🌹🍀🏵️🌱🍁🍀🥀
दूर से ध्वज दर्शन मात्र से मंदिर दर्शन का फल मिलता है
🌹🍀🏵️🌱🍁🍀🥀
घटयात्रा कलशों की यात्रा नहीं हृदय की श्रद्धा की यात्रा है
🌹🍀🏵️🌱🍁🍀🥀
मांगलिक क्रियाओं में मंगल कार्य होना चाहिए
🌹🍀🏵️🌱🍁🍀🥀
जिस मंदिर पर ध्वजा अच्छी नहीं लगी होती है उस नगर में परेशानियां आती हैं
🌹🍀🏵️🌱🍁🍀🥀
समाधिस्थ परम पूज्य
आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज से दीक्षित एवं परम पूज्य आचार्य श्री समय सागर जी महाराज के आज्ञानुवर्ती शिष्य मुनि श्री धर्म सागर जी महाराज,
मुनि श्री भाव सागर जी महाराज के सानिध्य में श्री पारसनाथ दिगंबर जैन तीर्थ भेलूपुर वाराणसी उत्तर प्रदेश में 21जुलाई 2026 को प्रातः काल की बेला मैं पूरे विश्व में मनाए जाने वाले अष्टाहानिका महापर्व के प्रथम दिन, श्री सिद्ध चक्र महामंडल विधान के अंतर्गत मांगलिक क्रियाएं की गई, अभिषेक एवं विशिष्ट मंत्र शांति धारा संपन्न हुई, घट यात्रा ध्वजारोहण की क्रियाएं की गई भारत के कई नगरों से आए लोगो को अनेक सौभाग्य प्राप्त हुए ,
इस अवसर पर धर्म सभा को संबोधित करते हुए मुनि श्री धर्मसागर जी महाराज ने कहा कि राष्ट्रीय पर्व भी हुआ करते हैं, धार्मिक पर्व भी हुआ करते हैं, सांस्कृतिक पर्व भी हुआ करते हैं, कुछ पर्व आत्मा से परमात्मा की ओर ले जाते हैं, सिद्ध चक्र महामंडल की महिमा अपरंपार है, घटयात्रा कलशों की यात्रा नहीं हृदय की श्रद्धा की यात्रा है, गुरु की कृपा से सब संपन्न होता है, बिना गुरु बन बनाये किसी की भी सिद्धत्व की यात्रा नहीं हुई है, ऐसा बंधन किस काम का जिससे कोई भी कार्य नहीं कर सके, मांगलिक क्रियाओं में मंगल कार्य होना चाहिए,
मुनि श्री भावसागर जी ने कहा कि ध्वजा का विशेष महत्व है,मंदिर के शिखर पर लहराने वाला ध्वज होता है। यह केवल सजावट नहीं, पूरा धर्म दर्शन है।
पीला रंग गुरु का होता है जो धार्मिक अनुष्ठान में सहायता करता है श्वेत रंग ज्ञान देने वाला होताहै ध्वज के मध्य में, विजय पताका जहां ध्वज फहरता है वहां अधर्म हारता है।
मंदिर का प्राण होती है ध्वजा, ध्वजा बिना मंदिर सूना है। दूर से ध्वज दर्शन मात्र से मंदिर दर्शन का फल मिलता है
ध्वजारोहण, ध्वज दान, जीर्ण ध्वज बदलना महापुण्य माना गया है। प्रतिष्ठा में सबसे पहले ध्वज की लगाते हैं
. पर्व की पहचान होती है ध्वज से इसलिए घर घर ध्वज लगता है। यह मंगल और धर्म प्रभावना का चिह्न है,
रथयात्रा का अग्रदूत होती है इसलिए भगवान की रथयात्रा में सबसे आगे ध्वज चलता है। वह भूमि को पवित्र करता चलता है
त्रिकोण ध्वज लगता है। भगवा रंग त्याग, ज्ञान और अग्नि का प्रतीक है। मंदिर के कलश पर ध्वज के साथ कलश भी होता है। रथयात्रा, कीर्तन में ध्वज आगे चलता है। नीला, पीला, लाल, सफेद, केसरिया यह भगवान के शरीर से निकले आभामंडल का प्रतीक है। शांति और करुणा का संदेश देता है। केसरिया रंग का त्रिकोण ध्वज भी होता है। जिसमें बीच में खंडा चिह्न होता है। यह शौर्य और धर्म रक्षा का प्रतीक है।सभी धर्मों में ध्वज ऊंचाई, विजय और पवित्रता का प्रतीक है। वास्तु में ध्वज दंड को बहुत शुभ माना गया है।मंदिर का ध्वज हमेशा पूर्व या उत्तर दिशा में लहराए तो ऊर्जा सबसे शुभ रहती है। घर पर ध्वज लगाएं तो ईशान कोण में लगाएं, ध्वज जितना ऊंचा होगा, उतनी सकारात्मक ऊर्जा फैलेगी। इसलिए मंदिर शिखर सबसे ऊंचा बनाकर ध्वज लगाते हैं, फहराता हुआ ध्वज वायव्य तत्व को सक्रिय करता है। इससे नकारात्मक शक्ति रुकती है और यश फैलता है
पंचरंगी ध्वज के पांचों रंग पांच तत्वों को संतुलित करते हैं। लाल अग्नि, हरा वायु, पीला पृथ्वी, सफेद जल, नीला आकाश तत्व का शोधन करता है,घर के मुख्य द्वार पर छोटा ध्वज लगाने से वास्तु दोष और नजर दोष कम होता है, ऐसी मान्यता है, ध्वज देखते ही मन में यह धार्मिक भाव आता है इससे धर्म के प्रति गर्व और अपनापन जागता है
लाल रंग शक्ति, पीला रंग ज्ञान, सफेद रंग शांति, हरा रंग विकास, नीला रंग गहराई देता है। पांचों रंग मिलकर मन को संतुलित करते हैं, दूर से लहराता ध्वज मन को एकाग्र करता है। मंदिर जाते समय ध्वज पर दृष्टि स्थिर करने से मन का भटकाव रुकता है
पर्व पर जब सबके घर एक जैसा ध्वज दिखता है तो समाज में एकता और संगठन का भाव मजबूत होता है, सुबह उठकर ध्वज दर्शन से दिन की शुरुआत में भगवान का स्मरण हो जाता है। पूरा दिन धर्ममय बीतता है
ध्वज केवल प्रतीक नहीं, चलता फिरता मंदिर है। भगवा ध्वज त्याग सिखाता है तो वास्तु उसे ऊर्जा का स्रोत मानता है और मनोविज्ञान उसे मन का संतुलनकर्ता मानता है।ध्वजा किस दिशा में गई है कार्यक्रम कैसा होगा उसका
अनुमान लगाया जाता है, प्रत्येक महोत्सव एवं सभी धर्म में यह कार्य किया जाता है, इससे पॉजिटिव एनर्जी मिलती है,मंदिर से टकराकर हवा ध्वजा के माध्यम से पूरे नगर के वातावरण को शुद्ध कर देती है, जिस मंदिर पर ध्वजा अच्छी नहीं लगी होती है उस नगर में परेशानियां आती हैं,

Related Posts