July 26, 2026
न्यूज़ वाराणसी 28/07/2026
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अष्टानि्हका महापर्व के आठवें दिन मांगलिक क्रियाये संपन्न हुई
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श्री सिद्ध चक्र महामंडल की मांगलिक क्रियाएं की गई
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- हर चतुर्दशी को क्षमावाणी मनाना चाहिए
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विश्व की सबसे पावरफुल भूमि यह है
🌹🍀🏵️🌱🍁🍀🥀 - 23वां चातुर्मास हमारा हो रहा है
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साधु विशुद्धिऔर साधना के माध्यम से इस चातुर्मास को अमूल्य बनाने का पुरुषार्थ करते हैं
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गंगा नदी के किनारे विशेष बुद्धि की प्राप्ति हो जाती है
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समाधिस्थ परम पूज्य
आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज से दीक्षित एवं परम पूज्य आचार्य श्री समय सागर जी महाराज के आज्ञानुवर्ती शिष्य मुनि श्री धर्म सागर जी महाराज,
मुनि श्री भाव सागर जी महाराज के सानिध्य में श्री पारसनाथ दिगंबर जैन तीर्थ भेलूपुर वाराणसी उत्तर प्रदेश में 28जुलाई 2026 को प्रातः काल की बेला मैं पूरे विश्व में मनाए जाने वाले अष्टाहानिका महापर्व के आठवें दिन, श्री सिद्ध चक्र महामंडल विधान के अंतर्गत मांगलिक क्रियाएं की गई, अभिषेक एवं विशिष्ट मंत्र शांति धारा संपन्न हुई, भारत के कई नगरों से आए लोगो को अनेक सौभाग्य प्राप्त हुए, मुनिसंघ ने भक्ति पढ़कर के चातुर्मास की स्थापना की,
अवसर पर धर्म सभा को संबोधित करते हुए मुनि श्री धर्म सागर जी महाराज ने कहा कि आप चातुर्मास के लिए कटिबंध हो रहे हैं पूरे भारत के अनेक नगरों में चातुर्मास हो रहे हैं सभी को लाभ नहीं मिल पाता है, साधु विशुद्धिऔर साधना के माध्यम से इस चातुर्मास को अमूल्य बनाने का पुरुषार्थ करते हैं, भगवान की भक्ति से जोड़ने का उद्देश्य होता है, श्रावक के सहयोग से चातुर्मास होते हैं, हम लोग संयम की रक्षा के लिए आपत्ति काल के कारण आसपास की सीमा बनाकर रखते हैं, मुनि श्री भावसागर जी महाराज ने कहा कि आचार्य श्री शांति सागर जी महाराज दक्षिण ने कहा था कि 24 घंटे में 15 मिनट आत्मा का ध्यान करना चाहिए इससे असंख्यात गुणी निर्जरा होती है, उन्होंने 18 करोड़ जाप किया था, समाज में परिवार में रिश्तेदारों में कुछ हो जाता है तो क्षमा मांग लेना चाहिए, क्षमा मांगने से व्यक्ति हल्का हो जाता है, विश्व की सबसे पावरफुल भूमि यह है, यहां श्री जी, सुपार्श्वनाथ जी,श्री चंद्रप्रभ जी, श्री श्रेयांशनाथ जी,श्री पार्श्वनाथ जी भगवान
के गर्भ, जन्म, तप, ज्ञान कल्याणक हुए हैं, श्री पार्श्वनाथ भगवान का ज्ञान कल्याणक नहीं हुआ है, महावीर भगवान का समवशरण कई बार आया, आचार्यश्री संमत भद्र स्वामी का रोग दूर हुआ था, यहां प्रथम शताब्दी एवं पांचवीं शताब्दी की प्रतिमाएं प्राप्त हुई, सन् 1905 में स्यादवाद महाविद्यालय की स्थापना हुई थी जिसमें महाकवि आचार्य श्री ज्ञान सागर जी महामुनिराज ने ब्रह्मचारी अवस्था में अध्ययन किया था, उनकी यह ज्ञानस्थली है, उन्हीं के निमित्त से परम पूज्य आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज इतनी ऊंचाइओ पर पहुंचे,क्षु जिनेंद्र वर्णों ने यहां पर जैन धर्म के 5 इंसाइक्लोपीडिया जिनेंद्रसिद्धांत कोष की रचना की थी, गंगा नदी के किनारे विशेष बुद्धि की प्राप्ति हो जाती है,
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28 जुलाई के प्रवचन कार्यक्रम की लिंक देखें
https://www.youtube.com/live/2gOwQLhVhr0?si=P17dJWwYg1i-NnNJ
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https://youtu.be/qtYNqRoFPPg?si=vELVS0IDjDVbWMG
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https://www.youtube.com/live/7gWFX0XReRw?si=bDndSKPZD4R5HVID
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यूट्यूब चैनल जैन धर्म वाणी, एवं जैन वर्ल्ड विद्या
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रानू भैया नोहटा 7879068125
प्राशु.जैन खिमलासा
संभव जैन भोपाल 6260151350
