आरती

पंचपरमेष्ठी
इहविधि मंगल आरती कीजै, पंच परमपद भज सुख लीजै।। टेक। पहली आरती श्री जिनराजा, भवदधि पार उतार जिहाजा।। इहविधि मंगल आरती कीजै, पंच परमपद भज सुख लीजै।। दूसरी आरती सिद्धन केरी, सुमरन करत मिटै भव फेरी।। इहविधि मंगल आरती कीजै, पंच परमपद भज सुख लीजै।। तीसरी आरती सूरि मुनिन्दा, जनम-मरण दुख दूर करिन्दा।। इहविधि मंगल आरती कीजै, पंच परमपद भज सुख लीजै।। चौथी आरती श्रीउवज्झाया, दर्शन देखत पाप पलाया।। इहविधि मंगल आरती कीजै, पंच परमपद भज सुख लीजै।। पांचमी आरती साधु तिहारी, कुमति-विनाशन शिव अधिकारी।। इहविधि मंगल आरती कीजै, पंच परमपद भज सुख लीजै।। छट्टी आरती बाहुवली स्वामी, उनको वंदों आनंदकारी।।। इहविधि मंगल आरती कीजै, पंच परमपद भज सुख लीजै।। सातमि आरति श्रीजिनवानी, ‘द्यानत’ सुरग-मुकति सुखदानी।। इहविधि मंगल आरती कीजै, पंच परमपद भज सुख लीजै।। संध्या करके आरती कीजे, अपना जन्म सफल कर लीजे।। इहविधि मंगल आरती कीजै, पंच परमपद भज सुख लीजै।। सोने का दीप कपूर की बाती जग मग ज्योति जलें सारी राती।। इहविधि मंगल आरती कीजै, पंच परमपद भज सुख लीजै॥ *****
आचार्य श्री विद्यासागर जी
विद्यासागर की, गुणआगर की, शुभ मंगल दीप सजाय के। आज उतारूँ आरतिया…..॥1॥ मल्लप्पा श्री, श्रीमती के गर्भ विषैं गुरु आये। ग्राम सदलगा जन्म लिया है, सबजन मंगल गाये॥ गुरु जी सब जन मंगल गाये, न रागी की, द्वेषी की, शुभ मंगल दीप सजाय के। आज उतारूँ आरतिया…..॥2॥ गुरुवर पाँच महाव्रत धारी, आतम ब्रह्म विहारी। खड्गधार शिवपथ पर चलकर, शिथिलाचार निवारी॥ गुरुजी शिथिलाचार निवारी, गृह त्यागी की, वैरागी की, ले दीप सुमन का थाल रे। आज उतारूँ आरतिया…..॥3॥ गुरुवर आज नयन से लखकर, आलौकिक सुख पाया। भक्ति भाव से आरति करके, फूला नहीं समाया॥ गुरु जी फूला नहीं समाया, ऐसे मुनिवर को, ऐसे ऋषिवर को, हो वंदन बारम्बार हो। आज उतारुँ आरतिया…..॥4॥
श्री पारस प्रभु जी
भक्ति बेकरार है आनंद अपार है, आजा प्रभु पारस तेरा, जय जय जय जय कार है ! मंगल आरती लेकर स्वामी, आया तेरे द्वार जी, दर्शन देना पार्श्वप्रभु जी, होवे आतम ज्ञान जी, भक्ति बेकरार है…. चंदा देखे, सूरज देखे और देखे तारागन जी, तुम सम ज्ञान ज्योति ना देखे, हे पारस परमेश जी..भक्ति बेकरार है…. देव सभी दुनिया में देखे, देखे देश विदेश जी, तुम सम सच्चा देव ना देखा, हे पारस परमेश जी…भक्ति बेकरार है…. यह तन मेरा एक दिन चेतन मिटटी में मिल जाएगा, अर्पण करदू पारस चरण में, तू पारस बन जाएगा…भक्ति बेकरार है…. पारस प्रभु का द्वार है, भक्ति से भवपार है… पटेरिया जी में जिन मंदिर की महिमा अपरम्पार है….भक्ति बेकरार है…