जैन धर्म में मृत्यु का महोत्सव मनाया जाता है

न्यूज श्री सम्मेद शिखरजी 04/02/2026
जैन धर्म में मृत्यु का महोत्सव मनाया जाता है

  • श्रद्धांजलि सभा संपन्न हुई

महासमाधिधारक परम पूज्य
आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज से दीक्षित एवं परम पूज्य आचार्य श्री समय सागर जी महाराज के आज्ञानुवर्ती शिष्य मुनि श्री धर्म सागर जी महाराज
मुनि श्री भाव सागर जी महाराज(प्रथम) मुनि श्री आदि सागर जी महाराज, मुनि श्री भाव सागर जी महाराज (द्वितीय) ,आर्यिका श्री ऋजु मति माताजी, आर्यिका श्री अनंत मति माताजी, आर्यिका श्री आदर्श मति माताजी की संघस्थआर्यिका सहित 61आर्यिका माताजी के सान्निध्य में , 4फरवरी 2026 को श्री सम्मेद शिखरजी पावन धाम जिला गिरिडीह झारखंड में प्रातः काल की बेला में सहस्रनाम के 1008 मंत्रों के द्वारा अभिषेक हुआ , मुनि और आर्यिका संघ ने मंत्र का वाचन किया,दोपहर की बेला में श्रद्धांजलि सभा संपन्न हुई , ज्ञात होकि सप्तम प्रतिमाधारी मां की संलेखना 2 फरवरी को दोपहर में हुई थी,
इस अवसर पर धर्म सभा को संबोधित करते हुए
आर्यिका श्री अंतर मति जी ने कहा कि आचार्य श्री ने कहा था कि मैं उस बिहार के बारे में सोचता हूं कि कौन कहां होगा(समाधि के बारे में )

आर्यिका श्री दुर्लभ मति माता जी ने कहा कि मां जी से कहा था की विदेह क्षेत्र में विद्यमान 20 तीर्थंकर के दर्शन करना,

आर्यिका श्री कुशल मति माता जी ने कहा कि यही कार्य महत्वपूर्ण है,
आर्यिका श्री अनंत मति माताजी ने कहा कि आचार्य श्री ने कहा था कि गुरु की समाधि हमेशा स्मरण में रहती है,

,आर्यिका श्री ऋजुमति माताजी
ने कहा कि संलेखना होना महत्वपूर्ण कार्य है, मुनि श्री भाव सागर जी महाराज (द्वितीय) ने कहा कि मृत्यु पर विजय प्राप्त करना बहुत कठिन कार्य होता है,मुनि श्री भाव सागर जी महाराज (प्रथम) ने कहा कि जैन धर्म में मृत्यु का महोत्सव मनाया जाता है संलेखना के द्वारा, बुद्धि पूर्वक अपनी मृत्यु को सामने देखना यह वीरों का कार्य होता है,

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