मदर्स डे पर यह जरूर करें

झुमरी तिलैया कोडरमा न्यूज़ 09/05/2026

मदर्स डे पर यह जरूर करें

एक माँ 24 घंटे ड्यूटी पर रहती है

मां का सम्मान करिए उसको धन दीजिए जिससे कि उसकोअच्छा लगे

माँ का कर्ज हम सात जन्म में भी नहीं चुका सकते

माँ कोई रिश्ता नहीं, एक एहसास है

यह सुनते ही कई लोगों की आंखें नम हो गई

समाधिस्थ परम पूज्य
आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज से दीक्षित एवं परम पूज्य आचार्य श्री समय सागर जी महाराज के आज्ञानुवर्ती शिष्य मुनि श्री धर्म सागर जी महाराज,
मुनि श्री भाव सागर जी महाराज के सान्निध्य में 9मई2026 को प्रातः काल की बेला में श्री दिगंबर जैन नया मंदिर झुमरी तिलैया कोडरमा झारखंड में
विशेष मांगलिक क्रियाएं संपन्न हुई, महिला वर्ग एवं पुरुष वर्ग ने शास्त्र अर्पण का सौभाग्य प्राप्त किया,
इस अवसर पर धर्म सभा को संबोधित करते हुए
मुनि श्री भावसागर जी महाराज ने कहा कि
मां ही बच्चों को अच्छे संस्कार दे सकती है
माता मित्र हैं वे एक हित चिंतक कल्याण मित्र हैं जो संतानों को दोषो से बचाती हैं व्यसनो से बचाती हैं जीवन में ऐसे जो भी अनिष्ट हैं उन से बचाती हैं बच्चोे को अपने जीवन को पवित्र बनाना हो उत्तम बनाना हो आदर्श बनाना हो सुखी बनाना हो ऊर्ध्वगामी बनाना हो तो माता के द्वारा ही बन सकते हैं मां जीवन भर गरीबी में रहकर अपने बच्चों को पढ़ाती है अपने से अच्छा बनाती है मां भूखी रहकर बच्चों को भोजन देती है,
माँ शब्द सुनते ही आँखों के सामने एक ऐसी तस्वीर उभरती है जिसमें ममता है, त्याग है, और बिना शर्त प्यार है। माँ कोई रिश्ता नहीं, एक एहसास है। वो पहला स्पर्श है जिसने हमें दुनिया से मिलवाया, वो पहली लोरी है जिसने हमें सुलाया, और वो पहला आशीर्वाद है जिसने हमें जीना सिखाया।
माँ यानी बिना छुट्टी की नौकरी
एक माँ 24 घंटे ड्यूटी पर रहती है। न रविवार, न त्योहार, न बीमारी की छुट्टी। रात को बच्चा रोए तो नींद छोड़ देती है। खुद भूखी रहे पर बच्चे को पहले खिलाती है। स्कूल की कॉपी पर कवर चढ़ाने से लेकर जिंदगी के सबक सिखाने तक, माँ हर रोल निभाती है। डॉक्टर, टीचर, रसोइया, ड्राइवर, दोस्त सब एक ही इंसान में। और तनख्वाह सिर्फ बच्चे की एक मुस्कान।
माँ की ममता का हिसाब नहीं होता
विज्ञान कहता है कि बच्चे के जन्म के समय माँ को जो दर्द होता है, वो इंसान के शरीर की 20 हड्डियाँ एक साथ टूटने के बराबर है। फिर भी माँ बच्चे को देखते ही सारा दर्द भूल जाती है। ये कैसा जादू है,ये जादू है ममता का।
हम बड़े हो जाते हैं, शहर चले जाते हैं, व्यस्त हो जाते हैं। पर माँ के लिए हम हमेशा 5 साल के ही रहते हैं। फोन पर पहली बात पूछेगी ,बेटा खाना खाया, बीमार पड़ जाएं तो । हमारी सफलता पर सबसे धीरे ताली बजाएगी, पर आँखें सबसे पहले नम उसकी ही होंगी।
आज की माँ सिर्फ चूल्हे-चौके तक सीमित नहीं। वो ऑफिस भी संभालती है और घर भी। बच्चों का होमवर्क कराती है और अपनी मीटिंग भी अटेंड करती है। सीमा पर खड़े फौजी के हौसले की वजह भी एक माँ ही है।वृद्धाश्रमों के बढ़ते आंकड़े बताते हैं कि हम माँ के कर्ज को भूलते जा रहे हैं। जिस आँचल में हमने बरसों सुकून पाया, बुढ़ापे में वही आँचल हमें बोझ लगने लगा है। याद रखिए, माँ के पैरों के नीचे जन्नत यूँ ही नहीं कही गई। महंगे तोहफे नहीं, आपके दो पल का साथ चाहिए। दिन में एक बार फोन कर के पूछ लीजिए,माँ, कैसी हो,
: पूरी जिंदगी उसने हमारी सुनी, अब हमारी बारी है। उसकी बातें, किस्से, शिकायतें सब सुनिए।
बच्चों के सामने माँ को डाँटिए मत। जिसने आपको बोलना सिखाया, उसे चुप मत कराइए।
माँ अपनी तबियत सबसे आखिर में रखती है। आप उसके डॉक्टर बन जाइए।
माँ और मातृभूमि स्वर्ग से भी बढ़कर हैं।
माँ का कर्ज हम सात जन्म में भी नहीं चुका सकते। पर एक कोशिश तो कर सकते हैं – कि जब तक वो हैं, उन्हें ये एहसास दिला दें कि वो हमारे लिए क्या हैं।क्योंकि माँ होती है तो सब होता है। एक मां जो तीर्थकर को जन्म देती है वह अनंतानंत गुना पुण्यशाली होती है ,जो आचार्य को जन्म देती है वह अनंत गुना पुण्यशाली होती है, उपाध्याय को जन्म देती है वह महापुण्यशाली होती है, मुनिराज को जन्म देती है वह सर्वाधिक पुण्यशाली होती है, आर्यिका,एलक, क्षुल्लक , क्षुल्लिका को जन्म देती है वह सर्वाधिक पुण्यशाली होती है, व्रती, ब्रह्मचारी ,ब्रह्मचारिणी को जन्म देती है वह सहसाधिक पुण्यशाली होती है ,जो संतान अभिषेक, पूजन ,आहारदान
, स्वाध्याय करती है उसको जन्म देने वाली मां भी पुण्य शाली होती है, मां के हृदय का वात्सल्य नैनो की करुणा,वाणी की कोमलता व चारित्र की दृढ़ता संतान को सत्पथ पर चलने की और दृढ बने रहने की प्रेरणा देती है, मां शब्द मान नर्यादा का प्रथम अक्षर है, मां अपनी कोख से विद्वान, दार्शनिक, ऋषि, मुनि, त्यागी तपस्वी आदि को जन्म देती है, मां की गौरव गाथा सभी ने गाई है, मां 24 घंटे सातों दिन 60 मिनट निरंतर कार्य करती है,
बच्चों के उज्जवल भविष्य निर्माण में मां की महत्वपूर्ण भूमिका होती है, दुनिया के सारे रिश्तों की सिरमौर है मां, त्याग और सहनशीलता की प्रतिमूर्ति है ,ममता और मर्यादा ,कला और कल्पना भव,वैभव सबकी जननी है, दुनिया का सबसे अमीर आदमी भी मां के बिना गरीब है,
माँ नहीं तो कुछ भी नहीं।_मदर्स डे सिर्फ एक दिन नहीं, हर दिन माँ का दिन है। अपनी माँ को वह दीजिए जो उसको जरूरत है आज ही। कल का क्या भरोसा। मां ही प्रथम गुरु है, मां ममता का मंगल कलश है,
मां ने जिस संतान को बचपन से कष्ट सहनकर बड़ा किया है उस संतान का कर्तव्य है कि जीवन के अंतिम समय तक के खर्च की व्यवस्था करें, उनके भोजन आदि की व्यवस्था का ध्यान रखें
यह सुनते ही कई लोगों की आंखें नम हो गई
संपूर्ण जानकारी हेतु देखे
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रानू जैन नोहटा7879068125
संजय गंगवाल पूजा भंडार 7739463327
संतोष (मंदिर व्यवस्थापक) 7631157819
दीपक व्यवस्थापक
7294853537

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