पैदल चलने से चिकित्सा भी होती है

हजारीबाग 12/06 /2026

सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दायर करना चाहिए

पैदल चलने से चिकित्सा भी होती है

जिनके पैर चलते हैं, उनका ही शरीर टिकता है

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पैदल चलने से हृदय भी मजबूत रहता है

पैदल चलना एक वेट-बेयरिंग एक्सरसाइज है

ऊर्जा के संकट में देश की सहायता में मदद होती है

दवा महंगी है, पर चलना मुफ्त है

चलना दिमाग के लिए फ्रेशर का काम करता है
समाधिस्थ परम पूज्य
आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज से दीक्षित एवं परम पूज्य आचार्य श्री समय सागर जी महाराज के आज्ञानुवर्ती शिष्य
मुनि श्री भाव सागर जी महाराज के सान्निध्य में11 जून 2026 को प्रातः काल की बेला में श्री पारसनाथ दिगंबर जैन बाजार मंदिर हजारीबाग झारखंड में धर्म सभा का आयोजन किया गया जिसकेअंतर्गत मांगलिक क्रियाएं संपन्न हुई, महिला वर्ग एवं पुरुष वर्ग ने शास्त्र अर्पण किया,
धर्म सभा को संबोधित करते हुएमुनि श्री धर्म सागर जी महाराज ने अनेक उदाहरण के माध्यम से धार्मिक क्रियाओ को अच्छे ढंग से करने के बारे में बताया,मुनि श्री भावसागर जी महाराज ने कहा कि , प्रतिदिन पैदल चलो, रोज 30 मिनट का ये नुस्खा डॉक्टर को दूर रखता है,आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में लोग जिम, दवा और सप्लीमेंट के पीछे भाग रहे हैं। लेकिन सबसे सस्ती, आसान और असरदार दवा आपके पैरों में ही है, पैदल चलना रोज 30 से 45 मिनट की तेज चाल न सिर्फ वजन घटाती है, बल्कि शरीर और मन दोनों को दुरुस्त रखती है।दिल और ब्लड प्रेशर के लिए संजीवनी है,
तेज चलने से हार्ट रेट बढ़ता है, रक्त संचार बेहतर होता है। इससे खराब कोलेस्ट्रॉल कम होता है और अच्छे कोलेस्ट्रॉल की मात्रा बढ़ती है।
हाई ब्लड प्रेशर, हार्ट अटैक और स्ट्रोक का खतरा 30से40 प्रतिशत तक कम हो जाता है। रोज चलने वाले लोगों में हार्ट डिजीज की संभावना काफी कम देखी गई है। शुगर कंट्रोल में मददगार भी होता है,
खाने के बाद 15 मिनट चलने से शरीर इंसुलिन का बेहतर इस्तेमाल करता है। मांसपेशियां ग्लूकोज को सीधे ऊर्जा में बदल देती हैं। टाइप2 डायबिटीज के मरीजों के लिए ये दवा से कम नहींहै। प्री-डायबिटिक लोगों में शुगर बढ़ने से रोकती है।
हड्डियों और जोड़ों की ताकत बढ़तीहै,
पैदल चलना एक वेट-बेयरिंग एक्सरसाइज है। इससे हड्डियों का घनत्व बढ़ता है और ऑस्टियोपोरोसिस का खतरा कम होता है।
घुटने का दर्द, कमर दर्द और गठिया में राहत मिलती है। तेज चले तो वजन और मोटापा घटताहै,30 मिनट तेज चलने से लगभग 150से-200 कैलोरी बर्न होती हैं। अगर डाइट कंट्रोल हो तो महीना भर में 2से3 किलो वजन आसानी से घट सकता है।
पेट की चर्बी, जिसे ‘विसरल फैट’ कहते हैं, वही सबसे खतरनाक होती है। पैदल चलना इसे सबसे पहले घटाता है।
मानसिक तनाव और नींद में सुधार होता है,
चलते समय शरीर में एंडोर्फिन हार्मोन निकलता है, जिसे ‘हैप्पी हार्मोन’ कहते हैं।
तनाव, चिंता और डिप्रेशन में कमीआतीहै। रात को नींद भी गहरी आती है। सुबह-सुबह चलना दिमाग के लिए फ्रेशर का काम करता है।
पाचन और इम्यूनिटी मजबूत होती है,
पैदल चलने से आंतों की गति तेज होती है, कब्ज दूर होता है। साथ ही इम्यून सिस्टम एक्टिव होता है, जिससे सर्दी-जुकाम जैसी बीमारियां कम होती हैं।
ऐसे चलें ताकि पूरा फायदा मिले,
इतनी तेज चलो कि बात कर सको,
रोज 30-45 मिनट चलो तो एक्यूप्रेशर भी होता है,
कमर सीधी, कंधे ढीले, हाथ हिलाते हुए चलो।
दवा महंगी है, पर चलना मुफ्त है। जिम का खर्च बचाओ, और रोज 30 मिनट खुद को दो। याद रखो जिनके पैर चलते हैं, उनका ही शरीर टिकता है। लिफ्ट की जगह सीढ़ी लो, गाड़ी की जगह 1 किमी पैदल चलो। इससे पर्यावरण की सुरक्षा भी होगी शरीर भी स्वस्थ होगा, शुद्ध ऑक्सीजन की प्राप्ति होगी, पूरे शरीर का व्यायाम भी हो जाता है,पैर मात्र शरीर का अंग नहीं, यह तो धर्म की पदयात्रा का प्रथम सोपान है।
आधुनिक विज्ञान भी नंगे पैर चलने को ” अर्थिंग ” या ग्राउंडिंग” कहता है। धरती के मुक्त इलेक्ट्रॉन शरीर में जाकर कोर्टिसोल घटाते हैं,इस से तनाव कम होताहै,
शरीर की बायोलॉजिकल क्लॉक सेट होती है इससे नींद अच्छीआती है,रक्त संचार बेहतर होता है, इंफ्लेमेशन घटता है सूजन कम होती है, नंगे पैर चलने से मसल्स एक्टिव रहती हैं,
पैर का तलवा पूरे शरीर का नक्शा है। इसे “सोल रिफ्लेक्सोलॉजी” कहते हैं।
मस्तिष्क और पिट्यूटरी ग्रंथि से जुड़ा है। अंगूठे को दबाने से मानसिक शांति मिलती है।
लीवर, किडनी, पेट से जुड़ा है। यहाँ दबाव देने से पाचन सुधरता है।साइटिका और कमर दर्द से जुड़ी है। जब खड़े होते हैं, तो एड़ी पर पूरा भार आता है। यह प्राकृतिक एक्यूप्रेशर है जो उन्हें ऊर्जावान रखता है।
भागदौड़ भरी जिंदगी में हम सबसे ज्यादा अपने पैरों को ही नजरअंदाज करते हैं। ,आधुनिक विज्ञान और एक्यूप्रेशर तीनों ही मानते हैं कि स्वास्थ्य की कुंजी पैरो में छिपी है। ” पैदल चलने से हृदय भी मजबूत रहता है।
विशेषज्ञों के अनुसार पैर का तलवा पूरे शरीर का कंट्रोल पैनल है। अंगूठे का संबंध सिर से, मध्य भाग का पेट से और एड़ी का संबंध कमर दर्द से है। रोज 5 मिनट पैरों की मालिश या कंकड़ वाले रास्ते पर चलना पूरे शरीर के लिए लाभकारी है।
सुबह पार्क में 10 मिनट नंगे पैर टहलना लाभदायक होता है, । इससे संस्कार के साथ सेहत भी मिलेगी। क्योंकि स्वस्थ शरीर में ही धर्म की साधना संभव है।
आज पूरे विश्व में ऊर्जा का संकट है, वाहन का उपयोग कम करेंगे, तो पेट्रोल, डीजल की बचत भी होगी, और शरीर को शुद्ध ऑक्सीजन मिलेगी, तीर्थ वंदना करने में भी आनंद आता है, भारतीय संस्कृति जीवित रहती है, आगे आने वाली पीढ़ी भी इससे सीखती है, धन की भी बचत होती है, देश,परिवार पर आर्थिक बोझ नहीं आता है,
साधु के साथ पदयात्रा करना सौभाग्य की बात होती है, चाहे एक किलोमीटर पैदल चले लेकिन 10-15 लोग रहे भले ही फिर वाहन में बैठ जाएं, पैदल चलने वालों की भोजन की व्यवस्था पूरे भारत के हर नगर के महिला मंडल को करना चाहिए, जो आज साधुओं के एक्सीडेंट वाली घटनाएं हो रही हैं उनसे बचाव के लिए पूरे भारत की जैन समाज को सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दायर करना चाहिए, जिसमें दाहिनी ओर चलने की छूट मिलना चाहिए कानून में संशोधन होना चाहिए,
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