श्रुत पंचमी पर यह जरूर करें

हजारीबाग 12/06/2026

श्रुत पंचमी पर यह जरूर करें

समाधिस्थ परम पूज्य
आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज से दीक्षित एवं परम पूज्य आचार्य श्री समय सागर जी महाराज के आज्ञानुवर्ती शिष्य
मुनि श्री भाव सागर जी महाराज के सान्निध्य में12 जून 2026 को प्रातः काल की बेला में श्री पारसनाथ दिगंबर जैन बाजार मंदिर हजारीबाग झारखंड में धर्म सभा का आयोजन किया जगया जिसकेअंतर्गत मांगलिक क्रियाएं संपन्न हुई, अध्यक्ष विनायका,ने मुनि संघ से चर्चा की
धर्म सभा को संबोधित करते हुएमुनि श्री धर्म सागर जी महाराज ने बताया कि हम प्रत्येक क्रिया अच्छे ढंग से करेंगे तो हमारा जीवन अच्छा बनेगा,
मुनि श्री भाव सागर जी महाराज ने कहाकि दिगंबर जैन धर्म के अनुसार यह श्रुत पंचमी का दिन महा पवित्र दिन है इस दिन सबसे बड़े ग्रंथ षट्खंडागम ग्रंथ की रचना पूर्ण हुई थी, वैसे तो पूरी दुनिया में यह पर्व उत्साह से मनाया जाता है, लेकिन इस बार कुछ नए तरीके से मनाया जायेगा,
श्रुत पंचमी सिर्फ शास्त्र पूजा का दिन नहीं है, भगवान महावीर के निर्वाण के लगभग 683 वर्ष बाद जिनके पास श्रुत का ज्ञान था, वो भी विलुप्त होने लगा। आचार्य धरसेन को ध्यान में दिखा कि अगर अब श्रुत को लिपिबद्ध न किया गया तो शास्त्र लुप्त हो जाएगे ।
तुम षट्खंडागमकी रचना करो। मैं तुम्हें मौखिक रूप से श्रुत सुनाऊंगा।
गुफा में बैठकर पुष्पदंत और भूतबली मुनि ने 12 साल तक बिना रुके षट्खंडागम की रचना की। षट्खंडागम जैन दिगंबर परंपरा का सबसे प्राचीन और प्रमाणिक आगम ग्रंथ है। लगभग 2000 वर्ष प्राचीन है, इसी में सर्वप्रथम मंगलाचरण में णमोकार महामंत्र मिलता है,

  • इसमें कर्म लिखते-लिखते मुनियों के शरीर जीर्ण हो गएथे,आंखों की रोशनी कम हो गई, थी,पर उन्होंने कलम नहीं रोकी। उनका एक ही संकल्प था शास्त्र बचे तो हमारा जीवन सफल होगा,
    इसी कारण श्रुत पंचमी को षट्खंडागम रचना दिवस भी माना जाता है।
    पुष्पदंत और भूतबली मुनि ने दिखाया कि ज्ञान को लुप्त होने से बचाना तप से भी बड़ा काम है।
    बिना गुरु आज्ञा के श्रुत की रक्षा संभव नहीं। श्रुत पंचमी पर शास्त्र को पूजते हैं।
    आज आप मोबाइल पर शास्त्र पढ़ते हैं, पर कभी सोचो ये ज्ञान मुनियों के त्याग और तप का फल है।
    आज अकाल नहीं है, पर ज्ञान के प्रति उदासीनता का अकाल है। हम मोबाइल पर सब देखते हैं, पर शास्त्र के लिए 10 मिनट नहीं निकालते।
    श्रुत पंचमी हमें याद दिलाती है,कि जहां भी शास्त्र हो, उसे सम्मान दो। प्रतिदिन 2 पन्ने भी पढ़ोगे तो धीरे-धीरे मन बदलने लगेगा। ज्ञान को सिर्फ पढ़ो मत, आचरण में लाओ। तभी पुष्पदंत-भूतबली मुनि की तपस्या सार्थक होगी,
    शास्त्र रक्षा हेतु, तन मन वार दिया।
    पुष्पदंत भूतबली ने श्रुत को अमर किया था,
    मीडिया प्रभारी विजय लुहाडिया ने जानकारी दी कि 18 जून को श्री दिगंबर जैन मंदिर बढम बाजार मे प्रातः6बजे श्री धर्मनाथ भगवान का मोक्ष कल्याणक महोत्सव पूरे विश्व सहित हजारीबाग मे मनाया जायेगा,इस दिन गुरु पुष्य योग है , सर्वार्थ सिद्धि एवं रवि योग है, इस दिन निर्वाण लाडू अर्पण होगा,19 जून शुक्रवार को श्री पारसनाथ दिगंबर जैन बडाबाजार मंदिर में
    श्रुत पंचमी ,जिनवाणी रक्षा,ज्ञान महायज्ञ महोत्सव
    ,,पाठशाला में सहयोग करने वालों का सम्मान होगा, जीर्ण शीर्ण पुराने शास्त्रों को ठीक करने वालों को शास्त्र अर्पण करने का अवसर प्राप्त होगा, इतिहास में प्रथम बार श्रुत स्कंध यंत्र का
    का अभिषेक होगा,
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