हजारीबाग16/03/2026
मुनिराजों से मुनि श्री आराध्य सागर जी का मिलन हुआ
प्रार्थना में बहुत शक्ति होती है
भक्ति उत्साह देखकर लगता है धर्म का झंडा लहराएगा
गुणीजनो को देखकर प्रेम उमड़ना चाहिए
मुझे आनंद की अनुभूति हो रही है
महासमाधिधारक परम पूज्यू
आचार्य श्री 108विद्यासागर जी महाराज से दीक्षित एवं परम पूज्य आचार्य श्री108 समय सागर जी महाराज के आज्ञानुवर्ती शिष्य मुनि श्री108 धर्म सागर जी महाराज,
मुनि श्री 108भाव सागर जी महाराज से परम पूज्य पटटाचार्य श्री108 विशुद्ध सागर जी महाराज के शिष्य मुनि श्री108 आराध्य सागर जी महाराज से मिलन हुआ,क्षुल्लक श्री श्रेय सागर जी महाराज कभी आगमन हुआ, मुनि संघ का जगह-जगह प्रक्षालन किया गया आरती उतारी की, श्री पारसनाथ दिगंबर जैन बड़ा बाजार मंदिर हजारीबाग झारखंड में मुनि श्री ने मंदिर में दर्शन किए इसके बाद धर्म सभा का आयोजन किया गया जिसमें मंगलाचरण चित्र अनावरण, दीप प्रज्वलन किया गया, शास्त्र अर्पण किया गया, पद बिहार में सहयोग देने वालों का सम्मान किया गया, इस अवसर पर धर्म सभा को संबोधित करते हुए
क्षुल्लक श्री श्रेय सागर जी महाराज ने कहाकि आप लोगों की भक्ति उत्साह देखकर लगता है धर्म का झंडा लहराएगा, मुनि श्री भवसागर जी महाराज के गृहस्थ अवस्था में हमने दर्शन किए थे, मुनि श्री आराध्य सागर जी ने सबसे कठिन उपवास सिंह निष्क्रिय व्रत तीन बार किए हैं, मुनिराज के मार्ग पर चलने का प्रयास करना चाहिए,
मुनिश्री आराध्य सागर जी महाराज ने कहा कि बहुत प्रसन्नता की बात है की चातुर्मास के लिए जा रहे हैं और दो मुनिराज के दर्शन हो गए हैं यह धरती के देवता हैं,
मुनिश्री भाव सागर जी महाराज ने कहा कि मुनिराज के पद यात्रा में सहयोग देने वाला भगवान बनता है, पद बिहार मेंआहार देने से अनंत गुना पुण्य का अर्जन होता है, 18 जून को देव,शास्त्र, गुरु रक्षा महोत्सव में इस बार महिलाओं को शास्त्र को मस्तक पर विराजमान करके शामिल होना है, इस दिन दुनिया का सबसे बड़ा मुहर्तहै, गुरु पुष्य योग, सर्वार्थ सिद्धि योग, रवि योग, श्री धर्मनाथ भगवान का मोक्ष कल्याणक महोत्सव, ऐसे 4 संयोग बना रहे हैं, शुभ मुहूर्त में अच्छे कार्य करने से विशेष लाभ होता है, मुनि श्री आरध्य सागर जी महाराज ने इतने सारे उपवास किए हैं वह तपस्वी हैं, पद बिहार में सभी को सहयोग देना चाहिये, साधु सभी के होते हैं,
मुनिश्री धर्म सागर जी महाराज ने कहा कि संतों का समागम देखना पुण्य का योग है, गुणानुराग होता है तब पुण्य के अवसर आते हैं, मुनि श्री आराध्य सागर जी उपवास करते हैं मौन के साधक है, अमरकंटक और कुंडलपुर में मिले हैं वह, यह तीन लोक का पूज्य पद है, आपके आगमन से धर्म सभा की शोभा बढ़ गई है, गुणीजनो को देखकर प्रेम उमड़ना चाहिए, मुनि श्री बहुत सरल है विनयशील है, प्रार्थना में बहुत शक्ति होती है, श्री सम्मेद शिखरजी में 61 आर्यिका थी, बहुत दिन बाद मुनिराज मिले हैं, जितना समागम मिल जाए उतना अच्छा है, मुझे आनंद की अनुभूति हो रही है,
