डिजिटल ग्रंथालय पठशाला देश-विदेश में होना चाहिए

हजारीबाग न्यूज़ 19/06/2026

डिजिटल ग्रंथालय पठशाला देश-विदेश में होना चाहिए
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धार्मिक क्रियाएं मॉडर्न जमाने के अनुसार तालमेल रखकर करना चाहिए
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यह दुनिया का सबसे बडा महापर्व है
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भगवान से बढ़कर उनकी वाणी होती है
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2000 वर्ष पहले लिपिबद्ध हुए थे शास्त्र
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इसके पूर्व लिखित नहीं मिलते थे शास्त्र
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आने वाली पीढ़ियां नहीं तो धर्म से दूर होती जाएगी
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जिनवाणी मां कई तरीके से समझाती है
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शास्त्रों की विनय करने से मेमोरी अच्छी हो जाती है
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शास्त्र दान करने से आचार्य कुंदकुंद स्वामी बने
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समाधिस्थ परम पूज्य
आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज से दीक्षित एवं परम पूज्य आचार्य श्री समय सागर जी महाराज के आज्ञानुवर्ती शिष्य मुनि श्री धर्म सागर जी महाराज,मुनि श्री भाव सागर जी महाराज के सान्निध्य में 19जून2026 को प्रातः काल की बेला में श्री दिगंबर जैन बड़ा बाजार मंदिर
हजारीबाग झारखंड में श्रुत पंचमी महोत्सव मनाया गया, ,षट्खंडागम ग्रंथों की महापूजन की गई, पाठशाला एवं ग्रंथालय में सहयोग करने वालों को शास्त्र दान का अवसर प्रदान किया गया, देव,शास्त्र,गुरु की सेवा करने वालों का सम्मान किया गया,
इस अवसर पर धर्म सभा को संबोधित करते हुए
मुनि श्री भाव सागर जी महाराज ने कहा कि डिजिटल ग्रंथालय पाठशाला देश-विदेश में होना चाहिए, जिसके माध्यम से महिला पुरुष बालिकाएं युवा बच्चों को पाठशाला के माध्यम से शास्त्रों के माध्यम से जैन धर्म के बारे में अच्छे से बताया जा सके और सिखाया जा सके, क्योंकि तीन लोक के बारे में डिजिटल माध्यम से ही बताया जा सकता है, आज स्कूलों में स्मार्ट क्लासेस चलती हैं, इसी प्रकार से कठिन बातों को सरल तरीके से बताना जरूरी है, मॉडर्न जमाने के हिसाब से सुविधा नहीं देंगे तो लोग धर्म से दूर होते चले जाएंगे, आज एआई के माध्यम से सभी कार्य हो रहे हैं, धार्मिक क्रियाओं में भी इनका उपयोग करके लोगों को धर्म से जोड़ के रखना है, आने वाली पीढ़ियां नहीं तो धर्म से दूर होती जाएगी और अन्य कार्य में लिप्त रहेंगी, परम पूज्य आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज की बुद्धि बहुत अच्छी थी, उनकी 1600 से अधिक पूजन लिखी गई है यह वर्ल्ड रिकॉर्ड है,
मुनि श्री धर्म सागर जी महाराज ने कहा कि आज का दिवस जिनवाणी दिवस कहलाता है, श्रुत के माध्यम से आचार्यो का साक्षात्कार हो रहा है,भगवान से बढ़कर उनकी वाणी होती है, भगवान हमें हम तक लाते हैं, पुस्तकों की संख्या बढ़ रही है, कुछ भी याद नहीं रहता है,पहले कारण परंपरा से ज्ञान होता था काल के प्रभाव से घटता गया, पहले कर्ण परंपरा से ज्ञान होता था, सुख,शांति का साम्राज्य स्थापित करने के लिए यह जरूरी है,जिनवाणी अन्यथा नहीं होती है, जिनवाणी मां कई तरीके से समझाती है,
.कार्यक्रम का प्रसारण* जैन धर्म वाणी यूट्यूब चैनल जैन वर्ल्ड विद्यापर
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वेबसाईट:- www.jindharma.com
यू ट्यूब :- jaindharmvani
जैनधर्म वाणी, Jain world vidh ya
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आयोजक
सकल दिगंबर जैन समाज पंचायत कमेटी हजारीबाग (झारखंड)
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संपूर्ण जानकारी हेतु संपर्क सूत्र
संभव जैन भोपाल
62 60 1513 50

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