योग-प्राणायाम विश्वकी धरोहर है

हजारीबाग न्यूज़ 20/06/2026

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*योग-प्राणायाम विश्वकी धरोहर है
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सभी धर्मों में प्राणायाम का महत्व है
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सभी धर्मों ने माना श्वास परमात्मा तक पहुंचने का द्वार है
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योग ध्यान का अभ्यास किया गया
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जो श्वास को जीत ले, वो संसार को जीत ले
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समाधिस्थ परम पूज्य
आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज से दीक्षित एवं परम पूज्य आचार्य श्री समय सागर जी महाराज के आज्ञानुवर्ती शिष्य मुनि श्री धर्म सागर जी महाराज,मुनि श्री भाव सागर जी महाराज के सान्निध्य में 20जून2026 को प्रातः काल की बेला में श्री दिगंबर जैन बड़ा बाजार मंदिर
हजारीबाग झारखंड में योग ध्यान पर कार्यशाला आयोजित की गई जिसमें मुनि श्री ने योग और ज्ञान करवाया
इस अवसर पर धर्म सभा को संबोधित करते हुए
मुनि श्री भाव सागर जी महाराज ने कहा कि योग-प्राणायाम विश्वकी धरोहर है,
श्वास के माध्यम से जीवन-शक्ति का विस्तार करना प्राणायाम है।
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यह शरीर और मन का ब्रिज है। श्वास को साध लिया तो मन सध गया, मन सधा तो जीवन सध गया।
सभी धर्मों में प्राणायाम का महत्व है,
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कायोत्सर्ग से पहले प्राण स्थिर करो,श्वासोच्छ्वास पर ध्यान, 27 उच्छ्वास में मंत्र का अभ्यास करें, पूरक,कुंभक, रेचक करे, हर श्वास में नाम जपे,लंबी श्वास को सुखमना कहाहै, प्रभु केनाम से जुड़ना चाहिए आत्म-शुद्धि के लिए,

  • नाम अलग, विधि अलग, पर सभी धर्मों ने माना – श्वास परमात्मा तक पहुंचने का द्वार है
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    नर्वस सिस्टम धीमी गहरी श्वास पैरासिम्पैथेटिक नर्वस सिस्टम एक्टिव करती है। स्ट्रेस हार्मोन कोर्टिसोल 50 प्रतिशत तक घटता है। “
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जो श्वास को जीत ले, वो संसार को जीत ले” एक विचारक ने कहा था कि श्वास को देखो, बस देखो। श्वास ही भगवान है”।
प्रतिदिन कुछ मिनट के लिए मौन रहे। श्वास-श्वास पर जब श्वास ही मंत्र बन जाए तो बोलने की जरूरत क्या,मोबाइल का चार्जर 2 घंटे में फुल, पर शरीर का चार्जर प्राणायाम 10 मिनट में फुल फिर भी आप मोबाइल पकड़े हैं, श्वास नहीं,
प्राणायाम -दवा नहीं, दुआ है धर्म से विज्ञान तक एक मतहै भ्रामरी से नींद की गोली की जरूरत नहीं पड़ती।एंग्जायटी के लिए दवा नहीं भ्रामरी करो,प्राणायाम श्वास सबकी एक है। जैसे हवा का कोई धर्म नहीं, वैसे प्राणायाम का भी नहीं। यह मानवता की थेरेपी है। योग पूर्ण विज्ञान है पूर्ण चिकित्सा पद्धति है, व्यक्ति के निर्माण और उत्थान के ही नहीं बल्कि परिवार समाज राष्ट्र और विश्व में चहुमुखी विकास से भी यह सिद्ध हुआ है, आधुनिक मानव समाज तनाव, अशांति का शिकार है उसका समाधान योग है, योग मनुष्य को सकारात्मक चिंतन के पथ पर लाने की अद्भुत विद्या है, 225 वर्ष पुरानी एलोपैथी चिकित्सा पद्धति में फंसकर जिनका आर्थिक, शारीरिक एवं मानसिक शोषण होता है उनके लिए योग वरदान साबित होता है, करोडो वर्ष पुरानी योग विद्या का अभ्यास करके हमें फिर से उसका लाभ लेना है, अनुकूलता प्रतिकूलता, सिद्धि,असिद्धि सफलता असफलता जय पराजय में सम रहने को योग कहते हैं,
कार्यक्रम का प्रसारण जैन धर्म वाणी यूट्यूब चैनल जैन वर्ल्ड विद्यापर
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क्यूआर कोड
https://linktr.ee/Jindharmmatter
वेबसाईट:- www.jindharma.com
यू ट्यूब :- jaindharmvani
जैनधर्म वाणी, Jain world vidh ya
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आयोजक
सकल दिगंबर जैन समाज पंचायत कमेटी हजारीबाग (झारखंड)
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संपूर्ण जानकारी हेतु संपर्क सूत्र
संभव जैन भोपाल
62 60 1513 50

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