न्यूज़ वाराणसी 15/09/2026
*पूरे विश्व में मनाए जाने वाले दशलक्षण महापर्व प्रारंभ हुए *
*
66 करोड़ उपवास का फल मिलता है
क्षमा धारण करने से,
10 मिनट का क्रोध 600 मिनट की खुशियां बर्बाद कर देता है
समाधिस्थ परम पूज्य
आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज से दीक्षित एवं परम पूज्य आचार्य श्री समय सागर जी महाराज के आज्ञानुवर्ती शिष्य मुनि श्री धर्म सागर जी महाराज
मुनि श्री भाव सागर जी महाराज के सान्निध्य में
16सितंबर 2026 को प्रातः काल की बेला में श्री पारसनाथ दिगंबर जैन तीर्थ भेलूपुर वाराणसी उत्तर प्रदेश में दशलक्षण महापर्व के अंतर्गत मांगलिक क्रियाए की गयी, अभिषेक, शांतिधारा पूजन विधान किया गया,
,पूरे विश्व में मनाए जाने वाले दशलक्षण महापर्व जो 27 सितम्बर तक चलेंगे
धर्मसभा को संबोधित करते् हुए
मुनि श्री भाव सागर महाराज ने कहा कि पूरे विश्व में दश लक्षण पर्व प्रारंभ हो गए हैं 10 दिनों में नए लोग आते हैं उनको धार्मिक क्रियाएं अच्छे ढंग से सिखाना चाहिए
,मस्तिष्क में कॉर्टिसोल और एड्रेनालिन नामक तनाव-हार्मोन तेज़ी से बढ़ते हैं। यही कारण है कि रोड-रेज में एक क्षण का आवेश दुर्घटना बन जाता है, और सोशल मीडिया पर एक पल का आक्रोश किसी रिश्ते या प्रतिष्ठा को स्थायी क्षति पहुँचा देता है। मनोविज्ञान इसे एमिग्डला हाईजैक कहता है जहाँ भावनात्मक मस्तिष्क, तर्कशील मस्तिष्क पर हावी हो जाता है और व्यक्ति बिना सोचे प्रतिक्रिया दे बैठता है।
यह धर्म इसी हाईजैक से बचने का मार्ग सिखाता है प्रतिक्रिया नहीं, प्रत्युत्तर क्षमा कोई कमजोरी नहीं, बल्कि आत्म-नियंत्रण की उच्चतम अवस्था है। जो व्यक्ति क्षण-भर रुककर सोचता है, वह कर्म-बंध से भी बचता है और अपने मानसिक स्वास्थ्य की भी रक्षा करता है।
आज के डिजिटल युग में जहाँ ट्रोलिंग और ऑनलाइन विवाद आम हैं, वहाँ क्षमा कार्य करती है यह हमें बार-बार क्रोध के चक्र में फँसने से बचाती है।इसलिए संकल्प लें किसी एक व्यक्ति को, जिससे मन में मलिन भाव है, हृदय से क्षमा करें। यह केवल धार्मिक कर्तव्य नहीं, आपके अपने मानसिक शांति का द्वार है। यह पर्व 18000 वर्ष से अधिक समय से चला आ रहा है, धर्म एक माला है तो 10 लक्षण उसकी मणिया है, वर्ष में तीन बार 10 लक्षण पर्व आते हैं , 66 करोड़ उपवास का फल मिलता है क्षमा धारण करने से, 10 मिनट का क्रोध 600 मिनट की खुशियां बर्बाद कर देता है, भाद्र मास सभी महीनो का राजा है व्रत का भंडार है, देश, परिवार, समाज विश्व के लोगों से क्षमा मांगना चाहिए, तीव्र क्रोध आत्महत्या तक के लिए प्रेरित करता है, प्रतिदिन, सप्ताह में, 15 दिन महीने 3 महीने 6 महीने में क्षमा मांगना चाहिए,
मुनिश्री धर्म सागर जी ने कहा कि मन की शुद्धि क्षमावाणी से होती है, क्षमा 10 लक्षण धर्म की आधारशिला है, उत्तम क्षमा धर्म का दिन है, सभी व्रत,संयम आराधना का आधारभूत क्षमा है , फाउंडेशन सॉलिड होना चाहिए, क्षमा की महिमा गायी गई है, करोडो जप से बढ़कर क्षमा है, क्षमा का स्तर ऊंचा है,जब मनुष्य क्रोधित होता है, तो
