न्यूज़ वाराणसी
02/10/2024
विश्व अहिंसा दिवस महोत्सव मनाया गया
हिंसा को मिटाने के लिए अहिंसा का प्रचार आवश्यक है
गायों को पालना बंद कर दिया इसलिए कत्ल खाने जाने लगी
गाय का घी शरीर में सभी प्रकार के जहर को नाश करने वालाहोता है
गाय के दूध का रंग पीला होता है और घी ‘स्वर्ण’ के रंग का होता है जो सर्वरोगनाशक और विष विनाशक होता है
पहली रोटी गाय को दे
तन, मन, धन खराब करती है शराब
जिस मुंह से प्रभु का नाम लेते हैं उसे मुंह में गुटका तंबाकू का जहर क्यों डालते हैं
महासमाधि धारक परम पूज्य आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज से दीक्षित एवं परम पूज्य आचार्य श्री समय सागर जी महाराज के आज्ञानुवर्ती
मुनि श्री धर्म सागर जी महाराज
मुनि श्री भाव सागर जी महाराज के सानिध्य मे श्री पारसनाथ दिगंबर जैन तीर्थ भेलूपुर वाराणसी उत्तर प्रदेशमे 2 अक्टूबर 2026को धर्म सभा का आयोजन किया गया विश्व अहिंसा महोत्सव
के अंतर्गत
मांगलिक क्रियाएं संपन्न हुई, दिल्ली के 108 लोग शामिल हुए, भारत के अनेक नगरों से लोग शामिल हुए, स्थानीय प्रशासन को ज्ञापन दिया गया,
इस अवसर पर धर्म सभा को संबोधित करते हुए मुनि श्री भाव सागर जी महाराज ने कहा कि पृथ्वी पर कोई सम्पदा है तो वह गाय है, उसे मौत के घाट उतारा जा रहा है कोई रक्षा नहीं कर पा रहे हैं , गायों को पालना बंद कर दिया इसलिए कत्ल खाने जाने लगी गाय के दूध के कई फायदे हैं , रक्तवर्धक, आयुष प्रदान करनेवाला, ओज प्रदान करनेवाला, देहकांती बढानेवाला, सर्वरोग नाशक, अमृत के समान है , शरीर मे उत्पन्न होनेवाले जहर का नाश करता है। एलोपैथी दवाईयों, रासायनिक खाद, कीटकनाशक दवाईयों आदि से वायु, जल एवं अन्न के द्वारा शरीर में उत्पन्न होने वाले जहर को समाप्त करने की क्षमता केवल इसमेंहै। गाय को शतावरी खिलाकर, उस गोदुग्ध को क्षय रोग से पीडित व्यक्ति को पिलाने से रोग समाप्त हो जाता है , गाय का घी शरीर में सभी प्रकार के जहर को नाश करने वाला, घाव को भरने वाला, हृदय के लिए लाभकारी होता है। ताजा घी अधिक सुगंधित एवं स्वादिष्ट होता है। कैन्सर के विषाणुओं को नष्ट करने वाला है,हृदय रोग, कैन्सर, क्षय रोग इत्यादि बीमारियों से निजात दिलाने में सर्वोत्तम सहायक है। आँखो के दर्द होने पर पट्टी रखने से दर्द समाप्त हो जाता है। वर्तमान वैज्ञानिक मतानुसार ,8 प्रकार के प्रोटीन, 21 प्रकार के एमीनो एसिड, 11 प्रकार के चर्बीयुक्त एसिड, 6प्रकार के विटामिन, 25 प्रकार के खनिज तत्व,, 2प्रकार की शर्करा, 4प्रकार के फॉस्फोरस यौगिक और 29 प्रकार के नाईट्रोजन होते है। विटामिन-ए-1, करोटिन डी-ई, टोकोकेराल विटामिन बी-1, बी-2 राईबोफ्लेविन बी-3, बी-4 तथा विटामिन सी है। खनिजों में कैल्शियम, फॉस्फोरस, लोह, ताँबा, आयोडीन, मैग्नीज, क्लोरीन, सिलिकॉन मिले हुए हैं । एमिनो एसिड में लाइसिन, ट्रिप्टोफेन ओर हिक्वीटाईन प्रमुख हैं। दूध जो कार्बोहाईड्रेट हैं उनमे लैक्टोस प्रमुख है जो पाचन तन्त्र को व्यवस्थित रखता है । लैक्टेज इत्यादि एन्जाइम, विटामिन ‘ए’, ‘बी’, ‘सी’, ‘डी’, ‘ई’ और लेक्ट्रोकोम, क्रियेटीन, यूरिया, क्लोरीन फॉस्फेट, केसिनो मिश्रण इत्यादी मिलकर 100 से भी ज्यादा विशेष पदार्थ है । विज्ञान के अनुसार गोदुग्ध में मनुष्य के शरीर की समस्त आवश्यकताओं की पूर्ति करने की क्षमता है। उसमे 4.9 % शर्करा, 3.7% घी व 11% नाना प्रकार के एसिड है । 3.6 % प्रोटीन है जिसमें ल्युसन, ग्लूकेटिक एसिड, टिरोसीन, अमोनिया, फॉस्फोरस आदि 21पदार्थ सम्मिलित है । 7.5 % पौटेशियम, सोडियम इत्यादि ऐसे 17 रसायन हैं । घर में गाय के घी का दीपक जलाने से वातावरण की अशुद्धि दूर होकर वायुमण्डल शुद्ध एवं पवित्र बनता है। काली गाय का दूध त्रिदोष शामक और सर्वोत्तम है, गाय के दूध से कोलेस्ट्रोल की वृद्धि नहीं होती है, बल्कि हृदय एवं रक्त प्रवाह में आने वाली बाधाओं को दूर करता है। गाय की रीढ में ‘सूर्यकेतु’ नामक नाडी होती है जो सूर्य के प्रकाश में जाग्रत होती है, सूर्यकेतु नाडी के जागृत होने से स्वर्ण के रंग का वह एक पदार्थ छोडती है। इसी कारण गाय के मन दूध का रंग पीला होता है और घी ‘स्वर्ण’ के रंग का होता है जो सर्वरोगनाशक और विष विनाशक होता है । गाय का गर्मागर्म दूध-घी-हल्दी मासपेशियों के दर्द एवं हड्डी की चोट में फायदेमंद होता है । 4 बुँद गाय के घी से 90 से अधिक रोगों का उपचार विशेषज्ञ बताते है । हमेशा गाय की घी से 90 से अधिक रोगों का उपचार विशेषज्ञ बताते है । हमेशा गाय की घी खाना चाहिये क्योंकि दो-दो बूँद गाय का गुनगना घी नाक में अदभूत लाभ देता है। । गाय के घी से सिरदर्द, कान दर्द, आँखो के रोग, सायनस, एलर्जी, तनाव, स्मरणशक्ति आदि रोगों में भी लाभ होता है। गाय के दूध को पीने से थायराईड नहीं होता है। क्योंकि गाय के दूध में थायरॉईड ग्लाण्ड का अंश भी मिलता है, जिससे शरीर में स्फूर्ति तेजी से उत्पन्न होती है। गाय पर प्रेम से हाथ फेरने से दो महिने में उच्च रक्त चाप बिल्कुल ठीक हो जाता है। गाय भी अधिक दूध देने लगती है। गाय का दही पाचन शक्ति में वृद्धि करनेवाला है देशी गाय के घी के चमत्कार होते हैं,गाय के घी को आयुर्वेद में महाऔषधि ,दिव्य औषधि भी कहा जाता है। । इस प्रकार के प्रयोग से लकवे और कोमे वाले मरीज तक ठीक हुए है।
सोते समय गाय के घी की दो बुंद नाक में डाल कर उसे श्वांस के साथ अपने आप मतिष्क में जाने दें, काली गाय के घी से अनेक दुःखी व्यक्तियों को रोगमुक्त होते हुए देखा है। इसे गठिया कुष्ठरोग, जले तथा कटे घाव के दाग,
, नेत्र विकार, आदि पर आश्चर्यजनक लाभ होता है। इसी प्रकार जोडों मे दर्द, चोट, आदि अनेक बीमारियों से पीडित अनेक लोगों को घी से आश्चर्यजनक सफलता प्राप्त हुई
नाक में हमेशा तीन- तीन बूंद देशी गाय का घी विधिपूर्वक बनाया हुआ डालना शुरु कर दिया तो दो महिनों में आँख की रोशनी वापस आ गई ।
जिस मुंह से प्रभु का नाम लेते हैं उसे मुंह में गुटका तंबाकू का जहर क्यों डालते हैं
, बच्चों को स्मोकिंग से दूर रहना चाहिए ,यह धन भी बर्बाद करता है और शरीर भी ,नशे से सभी को दूर रहना चाहिए, इससे स्वर यंत्र का कैंसर, फेफड़े का कैंसर, मुंह का कैंसर , आदि बीमारी होती है, जिस मुंह से प्रभु का नाम लेते हैं उसे मुंह में गुटका तंबाकू का जहर क्यों डालते हैं ,विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार अमेरिका में 6 लाख व युरोप में 10 लाख से अधिक व्यक्ति प्रतिवर्ष तंबाकू के कारण समय से पूर्व मर जाते हैं.|
, संकल्प के बिना जीवन का कायाकल्प नहीं होता है ,जीवो को अभयदान देना सबसे बड़ा दान है, पहली रोटी गाय को दे, तन, मन, धन खराब करती है शराब, इससे दूर रहे नशीली वस्तुओं का सेवन नहीं करे |
नशे के द्वारा व्यक्ति अपना जीवन नाश कर देता है
अंग्रेजों के द्वारा मदिरालयों की स्थापना भारतीय संस्कृति पर कुठाराघात है मदिरालयों से देश का भविष्य अन्धकार की ओर जा रहा है। युवा पीढ़ी का सर्वनाश हो रहा है। विद्यालय, चिकित्सालय आदि को छोड़कर मदिरालयों की स्थापना की जा रही है, जो भारतीय संस्कृति को मुर्दा बना रही है ऐसे लोग देश के दुश्मन है। शराब ने मानवता को हलाल कर दिया है। शराब ने दुनियां को बेहाल कर दिया है। शराब से युवा लड़खड़ा जाते हैं, युवाओं के लड़खड़ाने से देश लड़खड़ा जाता है। शराब ने देश के प्रत्येक घर को अखाड़ा बना दिया है। माँ-बाप, बच्चे और पत्नी के बीच रोज लड़ाई होती है।कत्लखानों में मनुष्य दूसरे प्राणियों को हलाल करता है । परन्तु मद्यखाने में मनुष्य स्वयं को हलाल करता है। कत्लखानों में हलाल किया जाने वाला बिलखता है और में मद्यखानों में आदमी स्वयं बिलखता है। मद्यपान मनुष्य की जीवनरूपी नदी को गंदी नाली बना देता है।
” भक्ति में डुबने वाले भगवान बनते हैं, शराब में डुबने वाले शैतान बनते हैं। शराब पीने वाला भगवान के नशे में गम भूल जाता है, परन्तु बदले में पूरा परिवार गम में डूब जाता है। शराब महुवे से बनता है जब महुवे वृक्ष में लगते हैं तब सारे पत्ते गिर जाते हैं और पेड़ ठूठ जैसा खड़ा रहता हैं। जो उपदेश देता है कि तुम यदि इसका रस पियोगे तो मेरे जैसे झूठ बन जाओगे।
-बाप, बच्चे और पत्नी के बीच रोज लड़ाई होती है। पहले पैसा बर्बाद होता है बाद में बीमारी में पैसा लगने से घर बर्बाद होता है।
नशा, तंबाकू और गुटखा : मनोवैज्ञानिक और धार्मिक दृष्टि से एक घातक प्रवृत्तिहै
आज भारत में हर तीसरा व्यक्ति किसी न किसी रूप में तंबाकू का सेवन कर रहा है – बीड़ी, सिगरेट, खैनी, गुटखा, पान-मसाला। लिखा रहता है – तंबाकू से कैंसर होता है फिर भी लोग खाते हैं। क्यों? क्योंकि यह सिर्फ आदत नहीं, एक गुलामीऔर आत्मिक पतन है।
- तंबाकू में निकोटीन 10 सेकंड में दिमाग में पहुँचकर डोपामाइन हार्मोन छोड़ता है। व्यक्ति को 2 मिनट के लिए तनाव कम लगता है। दिमाग उसी झूठे सुख को बार-बार मांगता है।
व्यक्ति समस्या का समाधान नहीं करता, गुटखा खाकर समस्या को टालता है।
. संगति का असर होता है 80 प्रतिशत लोगों ने पहला नशा दोस्तों, तनाव, फिल्मों को देखकर शुरू किया।
. इच्छा-शक्ति का क्षय होता है, धीरे-धीरे व्यक्ति का खत्म हो जाता है। बिना गुटखा के उसे लगता है,मेरा दिमाग काम नहीं कर रहा, पेट साफ नहीं हो रहा, मुझे गुस्सा आ रहा है” – ये सब निकोटीन विड्रॉल के लक्षण हैं।
- याददाश्त कमजोर, चिड़चिड़ापन, नींद न आना, हीन भावना
- मुंह का कैंसर, फेफड़ों का कैंसर, हृदय रोग – विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार भारत में तंबाकू से हर साल 13 लाख से ज्यादा मौतें होती हैं
- मनोवैज्ञानिक सत्यहै गुटखा खाने वाला सोचता है “मैं इसे कभी भी छोड़ सकता हूँ” – यह सबसे बड़ा भ्रम है। यह है। -एक तारीख तय करें आज से नहीं, कल से छोड़ूंगा” कभी नहीं होगा। एक तारीख तय करो।
ट्रिगर पहचानो तनाव में कब इच्छा होती है, लिखो और उस जगह पर लौंग, इलायची, सौंफ रखो।
मस्तिष्क को नई आदत बनाने में 21 दिन लगते हैं। पहले 7 दिन सबसे कठिन हैं।
परिवार को बताओ, योग-प्राणायाम, टहलना, पानी ज्यादा पीना।
नशा मुक्ति केंद्र की मदद ले, जरूरत पड़े तो मनोचिकित्सक से सीबीटी थेरेपी लो, यह शर्म नहीं, समझदारी है
शरीर भगवान का मंदिर है, उसमें धुआँ और पीक भरना मंदिर को श्मशान बनाना है।
कोई भी धर्म नशे की अनुमति नहीं देता। धर्म कहता है – व्यसन आत्मा की परतंत्रता है। जो व्यक्ति गुटखा के बिना नहीं रह सकता, वह स्वतंत्र नहीं, गुलाम है।मनोविज्ञान कहता है,नशा तुम्हारे दिमाग को गुलाम बनाता है।धर्म कहता है नशा तुम्हारी आत्मा को गुलाम बनाता है।
गुटखा 10 रुपये का नहीं, 10 लाख के इलाज की पहली किस्त है।
गुटखा खाने वाला मरता नहीं, तिल-तिल कर अपने पूरे परिवार को मारता है
भक्ति में डूबने वाले भगवान बनते हैं, और गुटखा-शराब में डूबने वाले श्मशान की राख बनते हैं। हथकरघा के वस्त्र इस्तेमाल करने से गरीबों को रोजगार मिलता है, कैदी भी नशे से दूर रहकर हथकरघा के वस्त्र बनाते हैं,
मुनि श्री धर्म सागर जी महाराज ने कल्याण मंदिर स्तोत्र की व्याख्या करते हुए भक्ति का महत्व बताया,
