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गुरु गुणगान महोत्सव संपन्न हुआ
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आचार्य श्री ने जो कार्य किए वर्ल्ड रिकॉर्ड बनते चले गए
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आचार्य श्री की 2600 पूजन लिखी गई है जो वर्ल्ड रिकॉर्ड है
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उनकी साधना 56000 वर्ष की थी ग्रंथ के अनुसार
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आचार्य श्री ने 44 घंटे लगातार ध्यान किया था
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आचार्य कुंदकुंद स्वामी के बाद सबसे ज्यादा आचार्य पद पर रहने का सौभाग्य आचार्य श्री को प्राप्त हुआ
वाराणसी, 26 अक्टूबर 2026
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समाधिस्थ परम पूज्य आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज से दीक्षित एवं परम पूज्य आचार्य श्री समय सागर जी महाराज के आज्ञानुवर्ती शिष्य मुनि श्री धर्मसागर जी महाराज, मुनि श्री भावसागर जी महाराज के सानिध्य में श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन तीर्थ, भेलूपुर, वाराणसी (उ.प्र.) में 26 अक्टूबर 2026
को
.गुरु गुणगान महोत्सव के अंतर्गत प्रातः काल की बेला में अभिषेक ,शांतिधारा ,
पंच परमेष्ठी विधान किया गया ,
आचार्य श्री के चरण चिह्न का अभिषेक 108 कलश से किया गया, आचार्य श्री की 108 प्रकार की विशेष द्रव्य से पूजन की गई
,
मिष्ठान वितरण, किया गया
जरूरतमंदों को फल ,औषधि ,वस्त्र वितरण, किया गया, डॉ कंनगी जैन औरंगाबाद महाराष्ट्र के द्वारा नृत्य की प्रस्तुति की गई,
इस अवसर पर धर्म सभा को संबोधित करते हुए मुनि श्री धर्मसागर जी महाराज ने, कहा कि, शरद पूर्णिमा के चांद को अमरता प्रदान की है आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के 12 वर्ष के अंतर से परम पूज्य आचार्य श्री समय सागर जी महाराज का जन्म हुआ था, इसके 12 वर्ष बाद मुनि श्री पूज्य सागर जी महाराज का जन्म हुआ था, आचार्य श्री ने बहुत से प्रकल्प दिए हैं, जन मानस के लिए राष्ट्र के उत्थान के लिए प्रकल्प दिए हैं, प्रतिभास्थली के माध्यम से बालिकाओं के संस्कार के लिए कार्य किया है, भाग्योदय, पूर्णायु चिकित्सा प्रदान कर रहे हैं, मुनि श्री पूज्य सागर जी महाराज सभी को ज्ञानवर्धक कार्य सिखाते है,
मुनि श्री भावसागर जी महाराज ने कहा कि परम पूज्य आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज ने सभी के ऊपर
उपकार किए हैं, बेरोजगारों को हथकरघा के माध्यम से रोजगार प्रदान किया है, , शांतिधारा दुग्ध योजना के माध्यम से शुद्ध खाद्य पदार्थों की प्राप्ति हो रही है, पूरी मैत्री के माध्यम से गरीबों को आजीविका की प्राप्ति हुई है, 135 गौशालाओं के माध्यम से गायों की रक्षा हो रही है, 2000 वर्ष तक रहने वाले पाषाण के मंदिरों
का निर्माण किया है, आचार्य श्री ने जो कार्य किए वर्ल्ड रिकॉर्ड बनते चले गए, आचार्य श्री की 2600 पूजन लिखी गई है जो वर्ल्ड रिकॉर्ड है, उनकी साधना 56000 वर्ष की थी ग्रंथ के अनुसार, आचार्य श्री ने 44 घंटे लगातार ध्यान किया था, आचार्य कुंदकुंद स्वामी के बाद सबसे ज्यादा आचार्य पद पर रहने का सौभाग्य आचार्य श्री को प्राप्त हुआ,
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प्रेषक समूह:- रानू भैया नोहटा मो .7879068125
ऋषभ जैन वाराणसी मो.9793281466
ग्राफिक्स सहयोग:- नितिन जैन अरिहंत कंप्यूटर टीकमगढ़ मो8226060609
