न्यूज़ वाराणसी𝟮𝟱/𝟬𝟵/𝟮𝟬𝟮𝟲
दशलक्षण महापर्व उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म के दसवे दिन मांगलिक क्रियाएं संपन्न हुई
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डीआरएम रेलवे आशीष जैन कार्यक्रम में शामिल हुए
- ब्रह्मचर्य उस ऊर्जा को केंद्रित आत्म स्फूर्ति प्रदान करता है
- ब्रह्मचर्य और स्मृति का निकट संबंध है
ब्रह्मचर्य सर्वे शक्तियों का मूल स्रोत है
ब्रह्मचर्य से वचन सिद्धि,कार्य सिद्धि और भविष्य का ज्ञान होता है
यश कीर्ति फैलती है
ब्रह्मचारी सदा पवित्र होता है
1 दिन का ब्रह्मचर्य का पालन करने से 9 लाख जीवो की रक्षा होती है
मानस्तंभ की प्रतिमा का महा मस्तकाभिषेक इस बार नए तरीके से होगा
समाधिस्थ परम पूज्य
आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज से दीक्षित एवं परम पूज्य आचार्य श्री समय सागर जी महाराज के आज्ञानुवर्ती शिष्य मुनि श्री धर्म सागर जी महाराज
मुनि श्री भाव सागर जी महाराज के सान्निध्य में
2 5सितंबर 2026 को प्रातः काल की बेला में श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन तीर्थ भेलूपुर वाराणसी उत्तर प्रदेश में दशलक्षण महापर्व उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म के दसवे दिन मांगलिक क्रियाए की गयी, दशलक्षण विधान किया गया, शाम को प्रतिदिन आरती चल रही है एवं मुनि श्री भाव सागर जी महाराज के द्वारा ध्यान करवाया जा रहा है, 10 उपवास करने वालों के द्वारा शास्त्र अर्पण किया गया,डीआरएम रेलवे आशीष जैन कार्यक्रम में शामिल हुए, उनका सम्मान किया गया, उन्होंने मुनि श्री का पाद प्रक्षालन किया, शास्त्र अर्पण किया,
4 अक्टूबर को प्रातः7 बजे . से
मानस्तंभ की प्रतिमा का महा मस्तकाभिषेक इस बार नए तरीके से होगा,
, धर्मसभा को संबोधित करते् हुए मुनि श्री धर्म सागर जी महाराज ने कहाकि घर में रहकर ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए, चेतना को ऊधगामी बनाने के लिए ब्रह्मचर्य व्रत आवश्यक है, भावना पाषाण को भगवान बना देती है, वासना इंसान को शैतान बना देती है, सबसे ज्यादा पाप आंख के माध्यम से होते हैं, ब्रह्मचर्य व्रत अनंत वासनाओं को चुल्लू भर बना देता है, नाम के लिए काम के लिए मरता है दशलक्षण पर्व, अष्टाहिन्का महापर्व, अष्टमी, चतुर्दशी विशेष तिथियां में ब्रह्मचर्य व्रत का पालन करना चाहिए,
मुनि श्री भाव सागर महाराज ने कहा कि आत्मा ही ब्रह्म है उस ब्रह्म स्वरूप आत्मा में करिया करना रमण करना ब्रह्मचर्य है, ब्रह्मचर्य उस ऊर्जा को केंद्रित आत्म स्फूर्ति प्रदान करता है, संयम के माध्यम से ऊर्जा का ऊध्वगमन होता है, इससे सभी साधनाओं में लाभ होता है, यह पवित्र मन का झरना है, इसके माध्यम से उन्नति के शिखर पर पहुंचते हैं, यह समस्त मंगल कार्यों का जनक है, ब्रह्मचर्यनिष्ठ व्यक्ति हिम्मत नहीं हारता है,विघ्न बाधाओ का सामना करता है, इससे मनोवांछित कार्य की सिद्धि होती है, बौद्धिक शक्तियों का विकास होता है, ब्रह्मचर्य और स्मृति का निकट संबंध है, यह सर्वे शक्तियों का मूल स्रोत है, इससे वचन सिद्धि कार्य सिद्धि और भविष्य का ज्ञान होता है, यश कीर्ति फैलती है, ब्रह्मचारी सदा पवित्र होता है, तीनों जगत में प्रशंसनीय कार्य है, इस लोक और परलोक में आंखें बहुत बुराई करती हैं, बच्चों को पढ़ाई तक ब्रह्मचर्य व्रत का पालन करना चाहिए, 1 दिन का ब्रह्मचर्य का पालन करने से 9 लाख जीवो की रक्षा होती है,
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25 /9 /2026
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25 /9 /2026
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- 25 /9 /2026 प्रवचन मुनि श्री भाव सागर जी महाराज* प्रवचन लिंक
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