पिच्छिका लेने वालों की ताली बजा कर अनुमोदना करना चाहिए

न्यूज़ वाराणसी 1 नवंबर 2026

पिच्छिका लेने वालों की ताली बजा कर अनुमोदना करना चाहिए

मोर एक ऐसा पक्षी है जो बिना किसी विषय वासना के ही अपना जीवन बिताता है

मोर कार्तिक मास के आसपास स्वतः ही अपने पंखो को छोड़ देता है

बिना पिच्छिका के सात कदम भी नही चल सकते है

मोर का औसतन जीवन काल 10 से 25 वर्ष होता है

भारतीय माँ गाय पुस्तक
का विमोचन हुआ

समाधिस्थ परम पूज्य आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज से दीक्षित एवं परम पूज्य आचार्य श्री समय सागर जी महाराज के आज्ञानुवर्ती शिष्य मुनि श्री धर्मसागर जी महाराज, मुनि श्री भावसागर जी महाराज के सानिध्य में एवं अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त युवा संचालक , ओजस्वी वक्ता , कवि हृदय शुभांशु जैन शहपुरा के निर्देशन में श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन तीर्थ, भेलूपुर, वाराणसी (उ.प्र.) में
1नवंबर 2026 रविवार को 28 वां पिच्छिका परिवर्तन महोत्सव संपन्न हुआ,
कार्यक्रम के अंतर्गत
मंगलाचरण, चित्र अनावरण, दीप प्रज्ज्वलित, शास्त्र अर्पण, पाद प्रक्षालन हुआ, आचार्य श्री की महापूजन की गयी,पाठशाला के बच्चों द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम की प्रस्तुति दी गई, मंच संचालन मुनि श्री भाव सागर जी महाराज ने किया, कार्यक्रम में भारत के विभिन्न नगरों से लोग शामिल हुए , मुनि श्री भाव सागर जी महाराज के द्वारा संकलित भारतीय माँ गाय पुस्तक का विमोचन किया गया, आईआईटी बीएचयू हेड ऑफ़ द डिपार्टमेंट संदीप कुमार भी कार्यक्रम में शामिल हुए,
,इस अवसर पर धर्म सभा को संबोधित करते हुए मुनि श्री धर्म सागर जी महाराज ने कहा कि पिच्छिका परिवर्तन संत का होता रहता है, पिक्चर का निरंतर प्रयोग में आने के कारण मृदुता खो देती है, यह उपकरण साधु की पहचान होती है, मोर को कष्ट देकर यह पंख प्राप्त नहीं होते हैं, सात कदम से ज्यादा बिना पिच्छिका के नहीं चलते हैं, पिच्छिका परिवर्तन की कोई तिथि नहीं होती है कभी भी कर सकते हैं, सिद्ध चक्र महामंडल विधान 10 से 15 नवंबर तक होना है सभी को शामिल होना है, आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के चरण चिह्न
वेदी पर विराजमान करवाना है ,मुनि श्री भाव सागर जी सभी को अच्छे कार्यों के लिए प्रेरणा देते रहते हैं,
मुनि श्री भाव सागर जी ने कहा कि मुद्रा मान्य होती है मुनि के पास पिच्छि कमंडल है तो वह मान्य है उपकरण वही कहलाते हैं जो आत्मा का उपकार करते चले जाएं जिसके ह्रदय में सदा दया रहती है वह , सर्वोत्कृष्ट मंगल है पिच्छिका लेने वालों की ताली बजा कर अनुमोदना करना चाहिए,मोर एक ऐसा पक्षी है जो बिना किसी विषय वासना के ही अपना जीवन बिताता है,मोर कार्तिक मास के आसपास स्वतः ही अपने पंखो को छोड़ देता है,
बिना पिच्छिका के सात कदम भी नही चल सकते है,मोर का औसतन जीवन काल 10 से 25 वर्ष होता है,
मुनि श्री धर्म सागर जी महाराज की पुरानी पिच्छिका लेने का सौभाग्य श्री वीरेंद्र कुमार जैन श्रीमती मीना जैन बानपुर जिला ललितपुर
ब्र. चंचल दीदी, ब्र विधि( जूही )दीदी
. मुनि श्री धर्म सागर महाराज के गृहस्थ जीवन के बहिन बहनोइ एवं भांजी को प्राप्त हुआ, मुनि श्री भाव सागर जी महाराज की पुरानी पिच्छिका लेने का सौभाग्य श्री पंकज कुमार जैन
श्री मती नीतू जैन बीना मध्य प्रदेश को प्राप्त हुआ
कार्यक्रम इस लिंक पर देखें
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*01 नवंबर 2026 कार्यक्रम,मुनि श्री धर्म सागर जी महाराज के प्रवचन,मुनि श्री भावसागर जी महाराज. के प्रवचन की लिंक
https://www.youtube.com/live/hfB3LwkiRkA?si=nxvKZnI_wHexUIjC
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प्रेषक समूह
रानू भैया नोहटा
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प्राशु जैन खिमलासा
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संयोजना नितिन जैन अरिहंत कंप्यूटर टीकमगढ़ मो.
8226060609

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