- विश्व क्षमा वाणी महोत्सव संपन्न हुआ
तीर्थ क्षेत्र की स्मारिका का विमोचन किया गया
40 प्रतिशत हत्या और 60 प्रतिशत घरेलू हिंसा के पीछे तात्कालिक क्रोध कारण होता है
*
66 करोड़ उपवास का फल मिलता है
क्षमा धारण करने से,
10 मिनट का क्रोध 600 मिनट की खुशियां बर्बाद कर देता है
देश, परिवार, समाज मित्र विश्व के लोगों से क्षमा मांगना चाहिए
न्यूज़ वाराणसी 27/09/2026
समाधिस्थ परम पूज्य
आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज से दीक्षित एवं परम पूज्य आचार्य श्री समय सागर जी महाराज के आज्ञानुवर्ती शिष्य मुनि श्री धर्म सागर जी महाराज
मुनि श्री भाव सागर जी महाराज के सान्निध्य में
27सितंबर 2026 को प्रातः काल की बेला में श्री पारसनाथ दिगंबर जैन तीर्थ भेलूपुर वाराणसी उत्तर प्रदेश में दशलक्षण महापर्व के अंतर्गत मांगलिक क्रियाए की गयी, तीर्थ क्षेत्र की स्मारिका का विमोचन किया गया,
,पूरे विश्व में मनाए जाने वाला विश्व क्षमा वाणी महोत्सव संपन्न हुआ सभी ने एक दूसरे से क्षमा मांगी, कमेटी ने दोनों मुनिराजो से क्षमा मांगी,
धर्मसभा को संबोधित करते् हुए
मुनि श्री भाव सागर महाराज ने कहा कि
,मस्तिष्क में कॉर्टिसोल और एड्रेनालिन नामक तनाव-हार्मोन तेज़ी से बढ़ते हैं। यही कारण है कि रोड-रेज में एक क्षण का आवेश दुर्घटना बन जाता है, और सोशल मीडिया पर एक पल का आक्रोश किसी रिश्ते या प्रतिष्ठा को स्थायी क्षति पहुँचा देता है। मनोविज्ञान इसे एमिग्डला हाईजैक कहता है जहाँ भावनात्मक मस्तिष्क, तर्कशील मस्तिष्क पर हावी हो जाता है और व्यक्ति बिना सोचे प्रतिक्रिया दे बैठता है।
यह धर्म इसी हाईजैक से बचने का मार्ग सिखाता है प्रतिक्रिया नहीं, प्रत्युत्तर क्षमा कोई कमजोरी नहीं, बल्कि आत्म-नियंत्रण की उच्चतम अवस्था है। जो व्यक्ति क्षण-भर रुककर सोचता है, वह कर्म-बंध से भी बचता है और अपने मानसिक स्वास्थ्य की भी रक्षा करता है।
आज के डिजिटल युग में जहाँ ट्रोलिंग और ऑनलाइन विवाद आम हैं, वहाँ क्षमा कार्य करती है यह हमें बार-बार क्रोध के चक्र में फँसने से बचाती है।इसलिए संकल्प लें किसी एक व्यक्ति को, जिससे मन में मलिन भाव है, हृदय से क्षमा करें। यह केवल धार्मिक कर्तव्य नहीं, आपके अपने मानसिक शांति का द्वार है। यह पर्व 18000 वर्ष से अधिक समय से चला आ रहा है, , 66 करोड़ उपवास का फल मिलता है क्षमा धारण करने से, 10 मिनट का क्रोध 600 मिनट की खुशियां बर्बाद कर देता है, , देश, परिवार, समाज विश्व के लोगों से क्षमा मांगना चाहिए, तीव्र क्रोध आत्महत्या तक के लिए प्रेरित करता है, प्रतिदिन, सप्ताह में, 15 दिन महीने 3 महीने 6 महीने में क्षमा मांगना चाहिए,मस्तिष्क में कॉर्टिसोल और एड्रेनालिन नामक तनाव-हार्मोन तेज़ी से बढ़ते हैं। यही कारण है कि रोड-रेज में एक क्षण का आवेश दुर्घटना बन जाता है, और सोशल मीडिया पर एक पल का आक्रोश किसी रिश्ते या प्रतिष्ठा को स्थायी क्षति पहुँचा देता है। मनोविज्ञान इसे एमिग्डला हाईजैक कहता है जहाँ भावनात्मक मस्तिष्क, तर्कशील मस्तिष्क पर हावी हो जाता है और व्यक्ति बिना सोचे प्रतिक्रिया दे बैठता है।
यह धर्म इसी हाईजैक से बचने का मार्ग सिखाता है प्रतिक्रिया नहीं, प्रत्युत्तर क्षमा कोई कमजोरी नहीं, बल्कि आत्म-नियंत्रण की उच्चतम अवस्था है।जो व्यक्ति क्षण-भर रुककर सोचता है, वह कर्म-बंध से भी बचता है और अपने मानसिक स्वास्थ्य की भी रक्षा करता है।
आज के डिजिटल युग में जहाँ ट्रोलिंग और ऑनलाइन विवाद आम हैं, वहाँ क्षमा कार्य करती है यह हमें बार-बार क्रोध के चक्र में फँसने से बचाती है।
इसलिए संकल्प लें किसी एक व्यक्ति को, जिससे मन में मलिन भाव है, हृदय से क्षमा करें।यह केवल धार्मिक कर्तव्य नहीं, आपके अपने मानसिक शांति का द्वार है।
यह पर्व 18000 वर्ष से अधिक समय से चला आ रहा है, 66 करोड़ उपवास का फल मिलता है
क्षमा धारण करने से, 10 मिनट का क्रोध 600 मिनट की खुशियां बर्बाद कर देता है,
देश, परिवार, समाज विश्व के लोगों से क्षमा मांगना चाहिए, तीव्र क्रोध आत्महत्या तक के लिए प्रेरित करता है,
प्रतिदिन, सप्ताह में, 15 दिन महीने 3 महीने 6 महीने में क्षमा मांगना चाहिए,
सभी व्रत,संयम आराधना का आधारभूत क्षमा है , क्षमा की महिमा गायी गई है, करोडो जप से बढ़कर क्षमा है,
क्षमा का स्तर ऊंचा है,जब मनुष्य क्रोधित होता है, तो
विश्व में क्षमा से बढ़कर अन्य कुछ नहीं है । क्षमा और उदारता वहीं सच्ची है जहाँ स्वार्थ का भी वास न हो क्षमा से व्यक्ति फूल सा हल्का हो जाता है।
इसका विपरीत तत्व है क्रोध, क्रोध की दोहरी तलवार मान के स्थान में रहती हैं।
क्षमा उनसे मांगे जिनसे हमारी बनती नहीं है।
क्षमा न करने से व्यक्ति तनाव ग्रस्त रहता है ।
क्षमा वंदनीय है, क्षमा जिंदगी, क्षमा साधना, क्षमा प्रार्थना आदि हैं। भारत पहला देश है जहाँ युद्ध हमेशा मजबूरी में लड़ा जाता है शौक से नहीं हैं। क्रोध से मनुष्य की अन्तः सावी ग्रन्थियों से विषाक्त द्रव्यों का स्राव होने लगता है जो पूरे शरीर में फैलने लगता हैं ।क्षमा जीवन उत्थान का मार्ग है खुशहाली का खजाना है परम सुख है मोक्ष का दरवाजा है, स्नेह की सरिता है आत्मा का आनंद है,महान तप है, हृदय का धर्म है, ऊंचा आचरण है, क्षमा से ही व्यक्ति ऊंचा उठता है, इससे शत्रु भी मित्र बन जाता है,
क्रोध को जीतने का उपाय क्षमा है,
इसकी कभी पराजय नहीं होती है। क्रोध से अनेक बीमारियां होती है हार्ट अटैक,ब्लड प्रेशर आदि “क्रोध – आत्मा का सबसे बड़ा शत्रु”
क्रोध क्या है क्रोध वो आग है जो दूसरों को जलाने से पहले खुद को जलाती है। जिस हाथ में अंगारा हो, वो पहले अपना ही हाथ जलाता है।
क्रोध इन सबका राजा है। एक क्षण का क्रोध वर्षों की तपस्या नष्ट कर देता है।
क्रोध में आदमी सोच नहीं पाता। तभी तो कहते हैं “गुस्से में लिया फैसला, पछतावे का कारण बनता है”
- माँ-बाप, भाई-बहन, पति-पत्नी – सब
क्रोध रिश्ते तोड़ देता है
. बीपी शुगर, हार्ट अटैक डॉ कहते हैं 70 प्रतिशत बीमारी क्रोध से होती है
जब क्रोध आए, 10 तक गिनती गिनो या मौन हो जाओ। बोला हुआ शब्द वापस नहीं आता
,सामने वाले को नहीं, खुद को क्षमा दो। क्षमा वीरों का आभूषण है
सोचो – क्या 5 साल बाद ये बात याद रहेगी99 प्रतिशत बातें भूलने लायक होती हैं
क्रोध वो चिंगारी है,
जो घर को राख कर दे।
पल भर में वो रिश्ते तोड़े,
जिन्हें बनाने में बरस लगे।
माफ कर देना सीख लो,
जीवन आसान हो जाएगा।
याद रखो, क्रोध करने से समस्या बड़ी होती है, हल नहीं।
जो क्रोध को जीत ले, वो लोक को जीत ले।
क्रोध एक मिनट की आग, जीवन भर की राख
आज हर घर की समस्या है क्रोध। पति-पत्नी में झगड़ा, बाप-बेटे में मनमुटाव, ऑफिस में तनाव। कारण छोटी-छोटी बातों पर बड़ा क्रोध।
आंकड़ों के अनुसार 40 प्रतिशत हत्या और 60 प्रतिशत घरेलू हिंसा के पीछे तात्कालिक क्रोध कारण होता है। सोचिए, 2 मिनट का गुस्सा जेल भेज देता है,
डॉ बताते हैं क्रोध आते ही शरीर में एड्रेनालिन हार्मोन बढ़ता है। बीपी 200 तक पहुंच जाता है। दिमाग की सोचने वाली नसें बंद हो जाती हैं। तभी आदमी क्रोध में वो कर जाता है जो होश में सोच भी नहीं सकता।
क्रोध आते ही 1 गिलास ठंडा जल ग्रहण करो 80 प्रतिशत गुस्सा शांत हो जाएगा,
जगह बदलो दो जिस कमरे में झगड़ा हो रहा है, वहां से हट जाओ
क्रोध को पकड़े रहना ऐसा है जैसे किसी और पर फेंकने के लिए अंगारा हाथ में रखना तुम ही जलोगे”
याद रखिए, क्रोध करना ताकत नहीं, कमजोरी है। असली ताकतवर वो है जो सह ले। आज से संकल्प लें मैं क्रोध नहीं करूंगा
बीपी, शुगर कंट्रोल रहेगी
. परिवार में प्रेम बढ़ेगा
. फैसले सही होंगे, पछतावा नहीं होगा
क्रोध हार है, क्षमा जीत है। आप क्या चुनेंगे
मुनिश्री धर्म सागर जी ने कहा कि जो हम अपने लिए नहीं चाहते वह दूसरों के साथ व्यवहार नहीं करें, गांठे निकालना चाहिए, 6 महीने से ज्यादा बैर नहीं रखना चाहिए, हृदय से हृदय को माफ करना चाहिए, रिश्तो में दरार गलतफहमियों से आती है, रिश्तो में खटास भी आती है,
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