न्यूज़ वाराणसी 04/08/2026
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घंटा बजाने से अनेक फायदे होते हैं
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समाधिस्थ परम पूज्य
आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज से दीक्षित एवं परम पूज्य आचार्य श्री समय सागर जी महाराज के आज्ञानुवर्ती शिष्य मुनि श्री धर्म सागर जी महाराज,
मुनि श्री भाव सागर जी महाराज के सानिध्य में श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन तीर्थ भेलूपुर वाराणसी उत्तर प्रदेश में 4 अगस्त 2026 को मांगलिक क्रियाएं की गई, अभिषेक एवं विशिष्ट मंत्र शांति धारा संपन्न हुई, भारत के कई नगरों से आए लोगो को अनेक सौभाग्य प्राप्त हुए,
इस अवसर पर धर्म सभा को संबोधित करते हुए
मुनि श्री भावसागर जी महाराज ने कहा कि नाद से निर्वाण तक की यात्रा है ,घंटा अनाहत नाद का प्रतीक है,घंटा को मंगल वाद्य कहा गया है,
अशुभ-निवारण नहीं, शुभ-स्मरणहै । घंटा का नाद आत्म-शरण का स्मरण कराता है।तीन बार नाद किया जाता है अभिषेक-पूजा से पहले,
घंटा नाद सुनकर मन का प्रमाद टूटे, आत्मा जागे यह उद्देश्य होता है, घंटा मूर्च्छा तोड़ने का अलार्म है, घंटा बजाना नहीं, घंटा सुनकर भीतर के घंटे को जगाना है, जब तक भीतर राग-द्वेष का शोर है, बाहर का घंटा बेकार। नकारात्मक ऊर्जा दूर हो जाती है, अनेक जगह ध्यान शुरू करने से पहले घंटा बजाया जाता है, कुछ ऐतिहासिक स्थान में समय सूचक घंटा लगा है ,
प्रार्थना के समय, उत्सव की सूचना,समुदाय को जोड़ने के लिए इसका प्रयोग होता है,
कई स्थानों पर घंटा रस्सी खींचकर बजाते हैं,
ध्वनि में शक्ति है मन जगाना है
फ्रीक्वेंसी कांस्य का घंटा 200 हटज से 2000 हटज तक ध्वनि उत्पन्न करता है, हार्मोनिक फ्रीक्वेंसी निकालता है। यह अल्फा ब्रेन वेव्स 8-12 हर्ट्स को ट्रिगर करती है। इससे इससे इससे मन शांत, बीपी डाउन होता है,
घंटा बजने से हवा में ऋणात्मक आयन बढ़ते हैं। स्टडी कहती है कि7 सेकंड घंटा नाद से 1000 घन मीटर क्षेत्र में 25 प्रतिशतनेगेटिव आयन बढ़े। ये सेरोटोनिन बढ़ाते हैं डिप्रेशन कम होता है,
420 से ऊपर की तीव्र ध्वनि से बैक्टीरिया नही रहते है। घंटा की गूंज कान से वेगस नर्व को उत्तेजित करती है। इसके माध्यम से हृदयगति धीमी, पाचन तेज, तनाव गायब होता है, ध्वनि से रेत पर सुंदर आकृति बनती है। घंटा नाद से मंदिर के जल में श्री जैसी आकृति बनती है,
गर्भगृह की गुंबद और घंटा के नाद से इको इफेक्ट होता है, 7 सेकंड तक गूंज रहती है। इतनी देर में मन ओम पर टिक जाता है। घंटा बजाने वाले के शरीर के आसपास इलेक्ट्रोमैग्नेट फील्ड होती है ईएमएफ 15 प्रतिशत तक बढ़ता है, किरेलीयान फोटोग्राफी में दिखा यह आभामंडल शुद्ध करता है।
बाहर का घंटा, भीतर की घंटी है
मोबाइल की रिंगटोन 10 बार बदल लेते हो, जीवन की रिंगटोन घंटा नाद कब सुनोगे
घंटा नाद अंधविश्वास नहीं, अल्ट्रासाउंड थैरेपी इसमें धर्म और विज्ञान एकमत है,एक विश्वविद्यालय के ध्वनि विज्ञान विभाग ने शोध में पाया किमंदिरश्र का घंटा 700 साल पुराना साउंड हीलिंग टूल है। 5 सेकंड का नाद 30 मिनट के मेडिटेशन बराबर मन शांत करता है।घंटा अलार्म क्लॉक है जो आत्मा को जगाता है हे जीव, प्रमाद छोड़, समय बीता जा रहा,
हृदय रोग विशेषज्ञ बीपी के मरीज रोज सुबह मंदिर घंटा सुनने से दवा 25 प्रतिशत कम हो सकती है,
घंटा का उद्देश्य एक इंसान को इंसान से, इंसान को भगवान से जोड़ना होता है,जब भी मन अशांत हो, 7 सेकंड घंटा नाद सुन लो फ्री का साइकेट्रिस्ट है यह,
साधक के लिए मौन सबसे बड़ा घंटा है। कई साधक12 वर्ष मौन रहे उस मौन का नाद आज 2600 साल बाद भी करोड़ों के कान में गूंज रहा है।बाहर का घंटा कान से टकराकर शांत हो जाता है। भीतर की समता का घंटा एक बार बज जाए तो जन्म-जन्म तक गूंजता है।घंटा बजाओ मत, घंटा बन जाओ ताकि तुम्हारे जीवन का नाद सुनकर दूसरों का प्रमाद टूटे, घंटा सुनकर के लोग समझ जाते हैं कि अभिषेक,आरती आदि प्रारंभ हो गई, स्कूल में घंटा की आवाज सुनकर मालूम चल जाता है कौन से नंबर की कक्षा शुरू हो रही है,
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आयोजक -श्री दिगंबर जैन समाज काशी भेलूपुर वाराणसी( उत्तर प्रदेश),
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चातुर्मास स्थल:- श्री पार्श्वनाथ गर्भ, जन्म, तप कल्याणक भूमि दिगंबर जैन तीर्थ भेलूपुर वाराणसी( उत्तर प्रदेश)
