न्यूज़ वाराणसी 03/08/2026
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माला फेरने से एक्युप्रेशर होता है
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चातुर्मास कलश स्थापित करने का सौभाग्य कनाडा के परिवार को भी प्राप्त हुआ
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माला कितनी भी कीमती हो, अगर मन नहीं लगा तो जाप व्यर्थ है
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समाधिस्थ परम पूज्य
आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज से दीक्षित एवं परम पूज्य आचार्य श्री समय सागर जी महाराज के आज्ञानुवर्ती शिष्य मुनि श्री धर्म सागर जी महाराज,
मुनि श्री भाव सागर जी महाराज के सानिध्य में श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन तीर्थ भेलूपुर वाराणसी उत्तर प्रदेश में 3 अगस्त 2026 को मांगलिक क्रियाएं की गई, अभिषेक एवं विशिष्ट मंत्र शांति धारा संपन्न हुई, भारत के कई नगरों से आए लोगो को अनेक सौभाग्य प्राप्त हुए,
चातुर्मास कलश स्थापित करने का सौभाग्य कनाडा के परिवार को भी प्राप्त हुआ, विश्व प्रसिद्ध कृति जिन गुणगान भी प्रदान की गई, समादेष्ठ परम पूज्य आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के चरण चिह्न का मोमेटो भी प्रदान किया गया,
इस अवसर पर धर्म सभा को संबोधित करते हुए
मुनि श्री भावसागर जी महाराज ने कहा कि सही जाप इस प्रकार करें
यदि मन लगाकर जाप करें तो उसके दुःख दूर हो सकते हैं। जाप करने में हमारा मन लगे व ध्यान एकाग्रचित हो उसमें रमण करें। यह अति आवश्यक है। अतः मन लगाकर जाप करने से हमारे स्वास्थ्य पर भी अनुकूल प्रभाव पड़ता है। फेरते समय माला के दाने हाथ की अंगुलियों से टच होने से एक्युप्रेशर भी होता है, जिससे अनेक रोग ठीक हो जाते हैं। अनेक ग्रंथ बताते हैं, कि जाप की माला अलग-अलग रत्नों की व अनेक प्रकार के काष्ठ की हो, तो उसका प्रभाव हमारे शरीर पर भी पड़ता है। अतः हमें ठीक तरह से माला फेरना चाहिए। सही जाप करने का तरीका व उसके लाभ के बारे में बताया,
कुछ लोग मंत्र जाप को अंगुलियों से करते हैं, कुछ मानसिक जाप करते हैं और कुछ लोग रुद्राक्ष, सोना, चांदी, मूँगा, मोती, माणिक्य, पन्ना आदि रत्नों के दानों से बनी माला का आसरा लेकर जप करते हैं। उन सभी का प्रभाव अलग-अलग होता है। जैसे- मोती की मणियों से जाप करने से रोग, अशांति दूर होते है। बिना गिनती की जाप करने की अपेक्षा हाथ की अंगुलियों से गिनकर जाप करने से दस गुणा अधिक फल मिलता है। लौंग की माला से पाँच हजार गुणा फल, कमल गट्टा की माला से दस लाख गुणा एवं दाने से बनी माला से जाप करने से करोड़ गुणा फल मिलता है।
मंत्रजाप गिनने के लिए आधार जो भी हो, उसके साथ-साथ उपयोग में स्थिरता और भावों की निर्मलता जरूरी है। माला कितनी भी कीमती हो, अगर मन नहीं लगा तो जाप व्यर्थ है। “
*माला फेरने से एक्युप्रेशर होता है और मन शांत रहता है। गिनकर जाप करना, स्थिर मन और निर्मल भाव से जाप करना सबसे ज्यादा फलदायी है, जाप करते समय हाथ चले, माला चले, पर मन भटके नहीं। तभी शांति मिलेगी।अनामिका से जाप करने से भावनाएँ विशुद्ध होती हैं। विशिष्ट ऊर्जा प्राप्त होती है।सबसे छोटी, दुबली, पतली अंत में कनिष्ठा अंगुली होती है। इसका संबंध स्वाधिष्ठान चक्र से होता है। कनिष्ठा से जाप करने से अहंकार आदि दुर्गुणों का शमन होता है और क्षमादि सद्गुणों का जागरण होता है।
जाप चाहे माला का सहारा लेकर करो या अंगुलियों से करो और चाहे बिना सहारा लिये करो, पर मंत्र जाप करना चाहिए। मंत्र जप करते समय तीर्थयात्रा, देवभक्ति, औषधि, ज्योतिषी और गुरु के प्रति जैसी भावना होती है। वैसी सिद्धि मिलती है और फल की प्राप्ति होती है,
अंगुली से जाप करने के आत्म सिद्धि के लिए तर्जनी को छोड़कर अन्य अंगुलियों का सहारा लेकर जाप करना श्रेष्ठ है। मोक्ष की सिद्धि के लिए अंगूठे से, धर्म कार्य की सिद्धि के लिए धर्म कार्य आदि पुण्य कार्य के लिए तर्जनी से, शांति के लिए मध्यमा से और
कनिष्ठा से सर्व कार्य की सिद्धि के लिए जाप करना श्रेष्ठ है। ये जो जाप के लक्षण हैं उनका उल्लंघन करने अथवा बिना गिनती के जो जाप किया जाता है, वह सभी निष्फल जाता है। अंगुली के अग्रभाग (नख) से, माला के मेरु को लांघकर के और व्याकुल चित्त से युक्त किया हुआ जाप निष्फल जाता है।
यदि माला लेकर जाप करते हैं, तो अंगूठे, मध्यमा और अनामिका से मणियों को पकड़कर खिसकाना चाहिए।
प्रत्येक व्यक्ति को एक माला मंदिर में अच्छी वाली रखना चाहिए
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आयोजक -श्री दिगंबर जैन समाज काशी भेलूपुर वाराणसी( उत्तर प्रदेश),
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चातुर्मास स्थल:- श्री पार्श्वनाथ गर्भ, जन्म, तप कल्याणक भूमि दिगंबर जैन तीर्थ भेलूपुर वाराणसी( उत्तर प्रदेश)

