न्यूज़ औरंगाबाद( बिहार) 01/07/2026
दीक्षा का अर्थ होता है लंच और मंच का बदल जाना
मुनि दीक्षा स्मृति महोत्सव पूरे विश्व सहित मनाया गया
प्रत्येक कार्य वर्ल्ड रिकॉर्ड बनते गए
ऐसे कई शिष्य है जिन्होंने एमएससी, एमटेक, डॉ.की डिग्री ,विदेश की सर्विस छोड़कर दीक्षा ली है
समाधिस्थ परम पूज्य
आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज से दीक्षित एवं परम पूज्य आचार्य श्री समय सागर जी महाराज के आज्ञानुवर्ती शिष्य मुनि श्री धर्म सागर जी महाराज,
मुनि श्री भाव सागर जी महाराज के सानिध्य में 1 जुलाई 2026 को प्रातः काल की बेला में समाधिस्थ परम पूज्य आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज का मुनि दीक्षा स्मृति महोत्सव पूरे विश्व सहित मनाया गया ,आचार्य श्री
की पूजन ,चित्र अनावरण,
दीप प्रज्वलन , पाद प्रक्षालन किया गया, आरती की गई,
सांस्कृतिक आयोजन संपन्न हुए ,जरूरतमंदों को आवश्यक सामग्री ,फल ,औषधि वितरित, किए गये,
, विशेष मांगलिक क्रियाएं संपन्न हुई, भारत के कई नगरों के लोग शामिल हुए,
कन्हैया लाल जी सेठी का सम्मान किया गया, मुनिराजो के आहार दान का सौभाग्य श्री कन्हैया लाल जी सेठी, विशाल सेठी परिवार को प्राप्त हुआ, कार्यक्रम का संचालन सौरभ जैन मुरैना ने किया ,
इस अवसर पर धर्म सभा को संबोधित करते हुए ,मुनि श्री धर्मसागर जी महाराज ने कहा कि पूज्य गुरुदेव का मुनि दीक्षा दिवस अच्छे से मनाया है, आचार्य भगवान के बारे में बताने की आवश्यकता नहीं है उन्होंने जो किया है उसकी सुगंधी फैल रही है उनकी अलग पहचान है उनके माध्यम से सभी सुरावत हो रहे हैं उन्होंने जो दिया है उसको बुलाया नहीं जा सकता उनकी भित्रागी छवि सबको आकर्षित करती थी आचार्य जी ने एक बार कहा था कि मैं दीक्षा अपने कल्याण के लिए ली है उन्होंने जरिया के माध्यम से उपदेश दिया,मुनि श्रीभावसागर जी महाराज ने कहा कि दीक्षा का अर्थ होता है लंच और मंच का बदल जाना,गुरु की महिमा को शब्दों की सीमा में नहीं बांधा जा सकता,गुरु सीमातीत है, गुणों के भंडार है, गुरु ही शिष्य के बुझे हुए दीप को प्रज्वलित कर सकते हैं,वह अंदर परमात्मा बनने की प्यास जगाते हैं, वह मोक्ष का ताला खोलना सिखाते हैं,गुरु कृपा से अनेक प्रकार के विद्या मंत्र सिद्ध हो जाते हैं ,वह आदर्श के देवता है,
गुरु निर्देशक जैसे होते हैं आचार्य श्री ने कई वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाए थे,गुरुदेव ने बड़े-बड़े महान कार्य किए हैं, वह कठिन ग्रंथ पढ़ते थे,वह बड़े-बड़े कवियों की टक्कर लेने वाले थे
गुरु जो कह रहे है स्वीकार कर लेना गुरु दक्षिणा है,आचार्य श्री विद्यासागर जी के ऐसे कई शिष्य है जिन्होंने एमएससी, एमटेक, डॉ.की डिग्री ,विदेश की सर्विस छोड़कर दीक्षा ली है,
विदेशी लोग ने आचार्य श्री की मूकमाटी पढ़ने के बाद मांसाहार,शराब का त्याग किया, था ,आचार्य श्री शब्दों के जादूगर थे, अनुशासन की जीवन्त मूर्ति थे,आचार्य श्री के पास नैनागिर मैं प्रवचन सुनने नाग नागिन आते थे, उनके दर्शन करके देश के राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, राज्यपाल ,मुख्यमंत्री ,सुप्रीम कोर्ट के जज, हाईकोर्ट के जज ,विचारक, साहित्यकार, शिक्षाविद, कानूनविद ,उद्योगपति ,प्रमुख संत ,विश्वविद्यालय कुलपति आए, आचार्य श्री ने लगभग 1लाख किलोमीटर की पदयात्रा की, उनके प्रत्येक कार्य वर्ल्ड रिकॉर्ड बनते गए, उन्होंने लगातार 44 घंटे ध्यान लगाया था, उन्होंने 135 गौशालाओं के लिए प्रेरणा दी, बालिकाओं की शिक्षा के लिए प्रतिभास्थली के लिए मार्गदर्शन दिया, शासन प्रशासन में अच्छे लोग रहे इसके लिए कई संस्थान के लिए आशीर्वाद दिया, लोगों को शुद्ध खाद्य पदार्थ मिले इसके लिए शांति धारा दुग्ध योजना के लिए प्रेरणा दी, कैदियों एवं अन्य लोगों को रोजगार के लिए हथकरघा के लिए मार्गदर्शन दिया,
