मौन जुलूस निकाला गया

हजारीबाग, न्यूज़ 25/05/2026

मौन जुलूस निकाला गया

अहिंसा की हिंसा पर हमेशा विजय हुई है

अहिंसा डरपोक और कायरों का मार्ग नहीं

अहिंसा का आचरण ही विश्व शांति का मार्ग है

विश्व के सभी देशों का साहित्य अहिंसा की प्रतिष्ठा से भरा है

समाधिस्थ परम पूज्य
आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज से दीक्षित एवं परम पूज्य आचार्य श्री समय सागर जी महाराज के आज्ञानुवर्ती शिष्य मुनि श्री धर्म सागर जी महाराज,
मुनि श्री भाव सागर जी महाराज के सानिध्य में 25 मई 2026 को प्रातः काल की बेला में श्री दिगंबर जैन बड़ा बाजार मंदिर हजारीबाग झारखंड में
मौन जुलूस निकाला गया, जिसमें बड़ी संख्या में महिलाएं, पुरुष, बालिकाएं, युवा शामिल हुए, उपायुक्त हेमंत सती को ज्ञापन दिया गया, जैन मुनियों की सुरक्षा को लेकर राष्ट्रीय संत सुरक्षा अभियान” की, अहिंसा के पथिक संतों की सुरक्षा “संतों की सुरक्षा, राष्ट्र की जिम्मेदारी”है, घटना की निष्पक्ष उच्चस्तरीय जांच हो,
संत सुरक्षा प्रोटोकॉल लागू हो,राष्ट्रीय संत सुरक्षा नीति बनाई जाए,
संतों के विरुद्ध अपराधों को विशेष संवेदनशील श्रेणी मिले,
प्रशासन और समाज के बीच समन्वय तंत्र बने,
नगर के प्रमुख मार्गों पर, मौन जुलूस निकाला गया ,
अनेक समाज के महानुभाव शामिल हुए,इस अवसर पर धर्म सभा को संबोधित करते हुए
मुनिन्दर श्री भावसागर जी महाराज ने कहा कि, भारत में जब-जब अहिंसा का बोलबाला रहा है भारत की समृद्धि बड़ी है, हिंसा को मिटाने के लिए अहिंसा का प्रचार आवश्यक है, अहिंसा डरपोक और कायरों का मार्ग नहीं यह उन बहादुरों का मार्ग है जो मृत्यु के वर्णन के लिए सदैव तत्पर रहते हैं जिसके हाथ में शास्त्र है वह बहादुर हो सकता है लेकिन उससे अधिक बहादुर बारे है जो बिना हिचकिचाहट बिना शस्त्र उठाए मृत्यु का सामना करता है, हमें पूरे भारत में साधु सुरक्षा समिति बनाना है और एक पद ऐसा रखना है जो पुलिस को सूचना दे सके, महिला ,बालिका ,युवा के अलग-अलग ग्रुप बनाए जाएं, अहिंसा जीवन की शान है, जीवन में शांतिमय घड़ियां ना हो संघर्ष ही संघर्ष हो तो इस लोक में श्वास लेना भी दुभर हो जाए, अहिंसा ही आत्मा का गुण है, अहिंसा का आचरण ही विश्व शांति का मार्ग है, संसार का ऐसा कोई धर्म नहीं है जिसमें अहिंसा का वर्णन ना हो, जंगल के पशु भी अनेक अंशो में अहिंसक रहकर ही जीवित रह सकते हैं, विश्व के सभी देशों का साहित्य अहिंसा की प्रतिष्ठा से भरा है, भारतीय संस्कृति में अहिंसा का महत्वपूर्ण स्थान है, अहिंसा की हिंसा पर हमेशा विजय हुई है, हिंसा और अहिंसा के बीच युद्ध चलता रहता है लेकिन जीत अहिंसा की ही होती है, सभी धर्म के लोगों को अहिंसा की दुदभि बजाना चाहिए, संत राष्ट्र को सबसे ज्यादा देते हैं और कम लेते हैं इसलिए उनकी रक्षा करना समस्त देशवासियों का कर्तव्य है,कांग्रेस नेता श्री सौरभ नारायण सिंह जी ने संतों की सुरक्षा एवं सम्मान के विषय में अपनी गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि संत समाज राष्ट्र की आध्यात्मिक धरोहर है। उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना हम सभी का दायित्व है, और इसके लिए वे स्वयं आगे बढ़कर हर आवश्यक सहयोग देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

प्रेषक समूह:-
रानू भैया नोहटा
7879068125
विजय लुहाडिया हजारीबाग
9431141041
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